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न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के सवाल पर अमेरिका में सियासी जंग

Fri, 26 Feb 2021 10:57 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, वाशिंगटन
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 26 Feb 2021 10:57 PM IST
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political war in America on issue of raising minimum wage
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : twitter.com/JoeBiden

अमेरिका में न्यूनतम वेतन प्रति घंटा 15 डॉलर करने के राष्ट्रपति जो बाइडन के इरादे को तगड़ा झटका लगा है। सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शुमर और सीनेट की बजट समिति के प्रमुख बर्नी सैंडर्स की तमाम कोशिशों के बावजूद 15 डॉलर प्रति घंटा न्यूनतम मजदूरी के प्रावधान को कोरोना राहत पैकेज के हिस्सा बनाने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। अब ये प्रस्ताव अलग से रखना होगा। जानकारों का कहना है कि अब उसे पारित कराने के लिए 100 सदस्यीय सीनेट में 60 वोटों की जरूरत होगी। इसलिए इसका पास होना तभी संभव है, जब रिपब्लिकन पार्टी के कम से कम दस सदस्य इसका समर्थन करें। ये संभावना फिलहाल बहुत कमजोर है।

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रिपब्लिकन पार्टी न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का विरोध कर रही है। फिलहाल, अमेरिका में न्यूनतम मजदूर 7.5 डॉलर प्रति घंटा है। कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने कहा है कि वे न्यूनतम मजदूरी बढ़ा कर 10 या 11 डॉलर करने के प्रस्ताव का समर्थन कर सकते हैं। लेकिन वे इसे 15 डॉलर करने के पक्ष में नहीं हैं। राष्ट्रपति बाइडन ने 1.9 खरब डॉलर के कोरोना राहत पैकेज की घोषणा की है। न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के प्रस्ताव को उन्होंने इसी पैकेज का हिस्सा बनाया था।
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बर्नी सैंडर्स ने इस प्रस्ताव सहित कोरोना राहत पैकेज को सीनेट के खास नियम रिकॉन्सिलिएशन के जरिए पास कराने की कोशिश की। इस नियम के तहत लाए गए प्रस्ताव को साधारण बहुमत यानी 51 सदस्यों के समर्थन से पास किया जा सकता है। लेकिन रिपब्लिकन पार्टी ने इसका विरोध किया। इस कारण ये प्रस्ताव पास नहीं हो सका। सीनेट में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के 50-50 सदस्य हैं। लेकिन उपराष्ट्रपति को वहां एक वोट देने का अधिकार है, इस कारण डेमोक्रेटिक पार्टी को साधारण बहुमत हासिल है।
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सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शुमर ने ये प्रस्ताव पारित ना होने पर निराशा जताई है। लेकिन उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन 15 डॉलर करने की लड़ाई उनकी पार्टी नहीं छोड़ेगी, क्योंकि अपना परिवार चलाने के लिए जद्दोजहद कर रहे अमेरिकी मजदूरों के लिए यह जरूरी है।

कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने एक बयान में कहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की राय में न्यूनतम वेतन बढ़ाना अनिवार्य है। इसलिए सदन में आने वाले कोरोना राहत पैकेज प्रस्ताव में न्यूनतम वेतन बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि 15 डॉलर प्रति घंटा न्यूनतम मजदूरी को सुनिश्चित करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी हर संभव तरीके अपनाएगी।

ह्वाइट हाउस की प्रवक्ता जेन सकी ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति बाइडन ये प्रस्ताव गिर जाने से निराश हैं, लेकिन सांसदों के फैसले और सीनेट की प्रक्रिया की सम्मान करते हैं। सकी ने कहा, राष्ट्रपति बाइडन कांग्रेस के नेताओं के साथ मिल कर ये प्रस्ताव पास कराने के लिए सबसे अच्छा रास्ता ढूंढने की कोशिश करेंगे, क्योंकि अमेरिका में ऐसा नहीं होना चाहिए कि काम करने के बावजूद कोई गरीबी में जीवन गुजारे।

रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्यों ने इस मामले में अपनी तरफ से बिल पेश किए हैं। सीनेटर मिट रोमनी और टॉम कॉटन ने 2026 तक क्रमिक रूप से बढ़ा कर न्यूनतम मजदूरी 10 डॉलर प्रति घंटा करने का विधेयक पेश किया है। एक दूसरे रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉवले ने प्रस्ताव रखा है कि न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी से आने वाले खर्च के बोझ को संघीय सरकार उठाए। इस प्रस्ताव की यह कह कर आलोचना की गई है कि इससे कम न्यूनतम मजदूरी रखने वाले राज्यों को ज्यादा लाभ होगा। 


डेमोक्रेटिक पार्टी ने सत्ता में आने पर न्यूनतम वेतन बढ़ाने का वादा किया था। इसलिए ऐसा करना उसके लिए सियासी रूप से भी बेहद अहम है। दूसरी तरफ रिपब्लिकन पार्टी इसमें अड़ेंगे डालकर अपन लिए उद्योगपतियों का समर्थन हासिल और मजबूत करने में जुटी है। इस बीच अमेरिका के करोड़ों मजदूर का हित अधर में लटक गया है। लेकिन ये मुद्दा अभी गरम है और आने वाले दिनों में इसको लेकर सियासी जंग और तेज होने की संभावना है।

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