गांधी और टॉलस्टॉय से प्रेरणा लेकर संबंध और मजबूत करें भारत और रूस : प्रधानमंत्री मोदी
- पूर्वी आर्थिक मंच की पांचवी बैठक में भाग लेने के लिए रूस पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
- रूस के इस सुदूर पूर्वी क्षेत्र की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं मोदी
- महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर विशेष डाक टिकट जारी करेगा रूस
- एक दूसरे से बेहद प्रभावित थे लियो टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी : पीएम मोदी
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पूर्वी आर्थिक मंच की पांचवी बैठक के पूर्ण सत्र में भाग लेने के लिए रूस के व्लादिवोस्तोक पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां महान रूसी लेखक और दार्शनिक लियो टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी के बारे में चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी ने एक-दूसरे पर अमिट छाप छोड़ी।
#WATCH live from Russia: Prime Minister Narendra Modi addresses at the Plenary Session of 5th Eastern Economic Forum, in Vladivostok. https://t.co/tqBTAJlYQZ
— ANI (@ANI) September 5, 2019
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘इस साल पूरी दुनिया महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रही है। टॉलस्टॉय और गांधी ने एक-दूसरे पर अमिट छाप छोड़ी। भारत और रूस को उनसे प्रेरणा लेकर अपने संबंधों को और सार्थक बनाना चाहिए और दोनों देश एक-दूसरे के विकास में बड़े हिस्सेदार बनें।’
उन्होंने कहा कि भारत और रूस को अपने साझा क्षेत्र और दुनिया के स्थायी व सुरक्षित भविष्य की ओर संयुक्त रूप से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘यह हमारी साझेदारी की एक नई शुरुआत होगी।’ बुधवार को रूस की दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे मोदी देश के सुदूर पूर्वी क्षेत्र की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।
पत्र व्यवहार के जरिए गांधी और टॉलस्टॉय में बना अनोखा संबंध
प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधी टॉलस्टॉय से काफी प्रेरित और प्रभावित थे। हालांकि, अपने जीवन में वे दोनों कभी एक-दूसरे से व्यक्तिगत तौर पर नहीं मिले लेकिन पत्रों के जरिए उनके बीच एक अनोखा रिश्ता था और वे विचारों का आदान-प्रदान करते थे।
अपनी आत्मकथा में गांधी ने लिखा है कि कैसे टॉलस्टॉय की किताब ‘द किंगडम ऑफ गॉड इज विदइन यू’ ने उनकी जिंदगी बदल दी। यह किताब महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में जोहानिसबर्ग से डरबन की ट्रेन यात्रा के दौरान एक अक्तूबर 1904 को पढ़ी थी।
गांधी की 150वीं जयंती पर विशेष डाक टिकट जारी करेगा रूस
वह इस किताब से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने एक अक्टूबर 1909 को टॉलस्टॉय को पत्र लिखा। इसके बाद उनका पत्र व्यवहार चलता रहा। गांधी ने जो किताब लिखी उसने भी टॉलस्टॉय पर गहरा प्रभाव छोड़ा और उसने वैश्विक प्रेम की अनंत संभावनाओं को लेकर उनके विचारों पर काफी असर डाला।
टॉलस्टॉय और गांधी के बीच यह पत्र व्यवहार भारत-रूस संबंधों के स्वर्णिम अध्याय में युग प्रवर्तक बन गया। रूसी सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि वह महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उनकी याद में एक विशेष डाक टिकट जारी करेगी।