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जी-20 : अमेरिका की घेराबंदी के लिए पीएम मोदी जिनपिंग और पुतिन से मिलेंगे
Tue, 25 Jun 2019 01:33 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 25 Jun 2019 01:33 AM IST
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PM Modi
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चीन व्यापारिक मोर्चे पर अमेरिका की घेराबंदी करने के लिए भारत और रूस की मदद ले सकता है। बीजिंग ने सोमवार को इस बात के संकेत दिए हैं। चीन के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ओसाका में इस हफ्ते होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अमेरिका की एकतरफा व्यापार नीतियों पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने कहा कि वह दोनों नेताओं से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के के व्यापार पर संरक्षणवादी रवैये और चीन पर लगातार बढ़ाए जा रहे शुल्क को नियंत्रित करने की रणनीति पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है चीनी राष्ट्रपति इस सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मिलने वाले हैं, इस दौरान दोनों के बीच लंबे समय से जारी व्यापार युद्ध पर चर्चा होगी। जापान के ओसाका में 28-29 जून को जी20 सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रअध्यक्ष शामिल होंगे।
रिश्तों की गर्माहट से व्यापार पर जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश
चीनी विदेश मंत्री झांग जुन ने कहा कि चीन के भारत और रूस के साथ संबंध इन दिनों में अच्छे रहे हैं। जिनपिंग इन्हीं रिश्तों की गर्माहट का इस्तेमाल अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर जमीं बर्फ को पिघलाने में करेंगे। तीनों नेताओं की मुलाकात महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस वक्त भारत-चीन और रूस के अलावा दुनिया के अन्य कई देश अमेरिका के व्यापारिक रवैये से परेशान हैं।
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उन्होंने कहा कि वह दोनों नेताओं से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के के व्यापार पर संरक्षणवादी रवैये और चीन पर लगातार बढ़ाए जा रहे शुल्क को नियंत्रित करने की रणनीति पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है चीनी राष्ट्रपति इस सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मिलने वाले हैं, इस दौरान दोनों के बीच लंबे समय से जारी व्यापार युद्ध पर चर्चा होगी। जापान के ओसाका में 28-29 जून को जी20 सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रअध्यक्ष शामिल होंगे।
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रिश्तों की गर्माहट से व्यापार पर जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश
चीनी विदेश मंत्री झांग जुन ने कहा कि चीन के भारत और रूस के साथ संबंध इन दिनों में अच्छे रहे हैं। जिनपिंग इन्हीं रिश्तों की गर्माहट का इस्तेमाल अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर जमीं बर्फ को पिघलाने में करेंगे। तीनों नेताओं की मुलाकात महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस वक्त भारत-चीन और रूस के अलावा दुनिया के अन्य कई देश अमेरिका के व्यापारिक रवैये से परेशान हैं।
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भारत भी झेल रहा है अड़ियल रवैया
चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि चीन की ही तरह भारत भी अमेरिका के अड़ियल रवैये को झेल रहा है। हाल ही में अमेरिका ने भारत को जीएसपी से बाहर किया है। ऐसे में उम्मीद है कि भारत अमेरिका की व्यापारिक मनमानी के खिलाफ चीन का साथ देगा।
अमेरिका विरोधी धारणा खड़ी कर रहा चीन
चीन लगातार व्यापारिक मोर्चे पर अमेरिका के खिलाफ एक धारणा खड़ी करने की जुगत लगा रहा है। जी20 सम्मेलन के दौरान चीन भारत रूस को अपनी विचारधार से अवगत कराएगा और इस पक्ष में इनका समर्थन हासिल करने की कोशिश करेगा।
व्यापार पर चीन अमेरिका दोनों नरम पड़ें
बीजिंग ने राष्ट्रपति जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की जी20 सम्मेलन से इतर होने वाली बैठक से पहले सोमवार को कहा कि व्यापार के मुद्दे पर चीन अपनी संप्रभुता की एवज में कोई बात स्वीकार नहीं करेगा। इस मुद्दे पर दोनों देशों को थोड़ा थोड़ा नरम पड़ना होगा। अमेरिका चीन से बड़े पैमाने पर व्यापार घाटे को कम करने की मांग कर रहा है, जो पिछले साल 539 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया था।
वह चीन पर बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर), प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और चीनी बाजारों में अमेरिकी सामानों की अधिक पहुंच के संरक्षण के लिए सत्यापन उपायों को अपनाने पर भी जोर दे रहा है। दोनों देशों ने एक दूसरे के उत्पादों पर आयात शुल्क भी बढ़ा रखा है। चीन को उम्मीद है जी20 देशों की बैठक में व्यापार के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कुछ बता बनेगी।
अमेरिका विरोधी धारणा खड़ी कर रहा चीन
चीन लगातार व्यापारिक मोर्चे पर अमेरिका के खिलाफ एक धारणा खड़ी करने की जुगत लगा रहा है। जी20 सम्मेलन के दौरान चीन भारत रूस को अपनी विचारधार से अवगत कराएगा और इस पक्ष में इनका समर्थन हासिल करने की कोशिश करेगा।
व्यापार पर चीन अमेरिका दोनों नरम पड़ें
बीजिंग ने राष्ट्रपति जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की जी20 सम्मेलन से इतर होने वाली बैठक से पहले सोमवार को कहा कि व्यापार के मुद्दे पर चीन अपनी संप्रभुता की एवज में कोई बात स्वीकार नहीं करेगा। इस मुद्दे पर दोनों देशों को थोड़ा थोड़ा नरम पड़ना होगा। अमेरिका चीन से बड़े पैमाने पर व्यापार घाटे को कम करने की मांग कर रहा है, जो पिछले साल 539 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया था।
वह चीन पर बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर), प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और चीनी बाजारों में अमेरिकी सामानों की अधिक पहुंच के संरक्षण के लिए सत्यापन उपायों को अपनाने पर भी जोर दे रहा है। दोनों देशों ने एक दूसरे के उत्पादों पर आयात शुल्क भी बढ़ा रखा है। चीन को उम्मीद है जी20 देशों की बैठक में व्यापार के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कुछ बता बनेगी।