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Nepal: 'राष्ट्र को कमजोर किया जाना, बर्दाश्त नहीं'; सोशल मीडिया मंचो पर बैन पर विरोध के बीच ओली की दो टूक

Sun, 07 Sep 2025 08:02 PM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 07 Sep 2025 08:02 PM IST
सार

काठमांडू के मध्य में मैतीघर मंडला में दर्जनों पत्रकारों ने सरकार के 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रतिबंध को तत्काल हटाने की भी मांग की।

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PM KP Sharma Oli Says Nation being undermined cannot be tolerated on Nepal govt’s ban on social media
केपी शर्मा ओली - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

नेपाल सरकार ने देश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नकेल कसते हुए फेसबुक, यूट्यूब और X (पूर्व में ट्विटर) समेत कुल 26 सोशल मीडिया वेबसाइट्स को बैन कर दिया है। जिसका देश में बड़ा विरोध हो रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रविवार को इस फैसले पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को कमजोर किया जाना कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बता दें कि यह कार्रवाई उन कंपनियों पर की गई है, जिन्होंने सरकार के नियमों के तहत पंजीकरण नहीं कराया था।

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वे सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा विसंगतियों और अहंकार का विरोध करेगी, और राष्ट्र को कमजोर करने वाले किसी भी कार्य को कभी स्वीकार नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि पार्टी सोशल मीडिया के खिलाफ नहीं है, लेकिन जो लोग नेपाल में व्यापार कर रहे हैं और पैसा कमा रहे हैं और फिर भी कानून का पालन नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ओली ने कहा कि यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। 
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केपी शर्मा ओली ने आगे कहा कि देश की आजादी मुट्ठी भर लोगों की नौकरी जाने से कहीं ज्यादा बड़ी है। कानून की अवहेलना, संविधान की अवहेलना और राष्ट्रीय गरिमा, स्वतंत्रता और संप्रभुता का अनादर करना कैसे स्वीकार्य हो सकता है?
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सरकार के इस कदम का हो रहा विरोध
इस बीच, रविवार को काठमांडू के मध्य में मैतीघर मंडला में दर्जनों पत्रकारों ने सरकार के 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रतिबंध को तत्काल हटाने की भी मांग की। साथ ही कहा कि यह कदम प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

इसके अलावा, नेपाल कम्प्यूटर एसोसिएशन (सीएएन) ने एक बयान में कहा कि फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे महत्वपूर्ण प्लेटफार्मों को एक साथ बंद करने से शिक्षा, व्यापार, संचार और आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

क्यों लगा प्रतिबंध, वजह जान लीजिए
सरकार के मुताबिक, नेपाल में सोशल मीडिया कंपनियों को पंजीकरण के लिए 28 अगस्त से सात दिन का समय दिया गया था। बीते बुधवार को जब समय सीमा समाप्त हो गई, तब भी किसी भी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म - जिसमें मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), अल्फाबेट (यूट्यूब), एक्स (पूर्व में ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन शामिल थे, पंजीकरण नहीं कराया। जिसके बाद सरकार ने गुरुवार से इन कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया। 


सोशल मीडिया मंचों पर नफरत फैलाने का आरोप
सरकार का कहना है कि फर्जी आईडी से जुड़े यूजर्स इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नफरत फैलाने, अफवाहें फैलाने और साइबर अपराधों के लिए कर रहे थे। इससे समाज में अशांति और असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही थीं।

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