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पेरू में राष्ट्रपति चुनाव ने पैदा किया 'सामाजिक अशांति' का खतरा
Tue, 08 Jun 2021 07:06 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लीमा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लीमा
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 08 Jun 2021 07:06 PM IST
सार
विश्लेषकों ने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव ने इस कोरोना महामारी से पीड़ित देश में गहरा विभाजन पैदा कर दिया है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि दोनों पक्षों के बीच अंतर इतना कम रहने का मतलब साफ है...
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पेरू चुनाव
- फोटो : Agency
विस्तार
साल 2000 से लगभग एक दशक तक जब लैटिन अमेरिकी देशों में वामपंथ की लहर चली थी, तब उससे बचे रह गए देशों में एक पेरू भी था। लेकिन रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव का संकेत यह है कि अब ये लहर वहां पहुंच गई है। हाल में बोलिविया और चिली के चुनावों में भी जीत वामपंथी दलों को मिली थी। पेरू में वोटों की शुरुआती गणना में दक्षिणपंथी उम्मीदवार केइको फुजीमोरी ने बढ़त बना ली थी। लेकिन जैसे ही ग्रामीण क्षेत्रों से नतीजे मिलने लगे, वामपंथी उम्मीदवार पेड्रो कास्तिलो खाई पाटते हुए आगे निकल गए। उसके बाद फुजीमोरी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाए।
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विश्लेषकों ने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव ने इस कोरोना महामारी से पीड़ित देश में गहरा विभाजन पैदा कर दिया है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि दोनों पक्षों के बीच अंतर इतना कम रहने का मतलब साफ है। दोनों उम्मीदवारों के बीच हुई तीखी गोलबंदी हुई है। एक तरफ शहरी इलाकों में रहने वाले धनी और मध्य वर्ग के लोग गोलबंद हुए, जिन्होंने फुजीमोरी को वोट दिए। दूसरी तरफ ग्रामीण और गरीब तबकों के लोगों ने कास्तिलो के पक्ष में मतदान किया।
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जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि ये चुनाव उस समय हुआ, जब आर्थिक मंदी के कारण पेरू की लगभग 10 फीसदी आबादी फिसल कर वापस गरीबी रेखा के नीचे चली गई है। लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं। इस कारण बहुत से लोग शहर छोड़ कर अपने पुश्तैनी गांव वापस जाने को मजबूर हुए हैं। ऐसे लोगों ने कास्तिलो के हक में वोट डाले। कास्तिलो ने ना सिर्फ जन कल्याण कार्यक्रमों को शुरू अपनाने का वादा किया है, बल्कि कहा है कि वे नया जन पक्षीय़ संविधान बनाने की प्रक्रिया भी शुरू करेंगे।
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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कास्तिलो को ग्रामीण इलाकों में लगभग 80 फीसदी वोट मिले हैं। जबकि खदान वाले धनी इलाकों में फुजीमोरी का बोलबाला रहा। राजधानी लीमा में भी फुजीमोरी जीतीं। यहां के सभी 43 जिलों में उन्होंने जीत दर्ज की। इसी तरह पास के बंदरगाह वाले शहर कलाओ में भी उन्हें भारी समर्थन मिला।
द इकॉनमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट के लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र के विशेषज्ञ निकोलस साल्दियास ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘मुकाबला इतना कड़ा रहा है कि ये तय है कि हारने वाला उम्मीदवार नतीजों को चुनौती देगा। इससे पेरू में लंबे समय की अस्थिरता पैदा हो सकती है। चुनाव में धांधली के आरोपों के कारण सामाजिक अशांति भड़क सकती है।’
इस चुनाव में ध्यान खींचने वाली एक बात कास्तिलो को लेकर देश में बनाया गया डर का माहौल रहा। फुजीमोरी के समर्थकों और मीडिया ने कास्तिलो के वामपंथी विचारों को लेकर भय फैलाने की कोशिश की। उसका असर भी हुआ। लीमा में कई मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने फुजीमोरी को इसलिए वोट दिया, ताकि उनका देश “वेनेजुएला या क्यूबा जैसा ना बन जाए”।
फुजीमोरी पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्तो फुजीमोरी की बेटी हैँ। इसके पहले भी वे दो बार राष्ट्रपति चुनाव हार चुकी थीं। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं। इस चुनाव में अवैध ढंग से एक करोड़ 70 लाख डॉलर का चंदा लेने का इल्जाम उन पर लगा। इस मामले की आपराधिक जांच चल रही है। दूसरी तरफ कास्तिलो पेशे से स्कूल शिक्षक हैं। उनके सादगी भरे जीवन की चुनाव के दौरान खूब चर्चा रही। लेकिन दोनों उम्मीदवारों के बीच इस फर्क से धनी मानी तबकों पर कोई फर्क नहीं पड़ा।