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पेगासस बवाल: जासूसी सॉफ्टवेयरों की बिक्री रोक ही एकमात्र उपाय, अमेरिकी व्हिसलब्लोअर स्नोडेन की राय
Tue, 20 Jul 2021 04:34 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 20 Jul 2021 04:34 PM IST
सार
इस्राइली कंपनी के सॉफ्टवेयर से जासूसी को लेकर भारत समेत दुनियाभर में मचे बवाल के बीच अमेरिकी व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन ने अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि ऐसे सॉफ्टवेयरों पर रोक नहीं लगी तो कोई मोबाइल सुरक्षित नहीं रहेगा।
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Edward Snowden
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विस्तार
साल 2013 में अमेरिका में नागरिकों की व्यापक जासूसी का खुलासा करने वाले ह्विशलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन ने जासूसी के सॉफ्टवेयर के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस्राइली कंपनी एनएसओ के पेगासस सॉफ्टवेयर से दुनिया भर में हुई जासूसी से मचे हड़कंप के बीच स्नोडेन से एक विशेष बातचीत लंदन से प्रकाशित अखबार द गार्जियन ने छापी है। स्नोडेन ने कहा कि अगर ऐसे जासूसी सॉफ्टवेयरों की बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई, तो फिर दुनिया का कोई मोबाइल फोन सुरक्षित नहीं रह जाएगा।
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स्नोडेन ने कहा है कि मुनाफा कमाने के लिए मैलवेयर (जासूसी सॉफ्टवेयर) बनाने वाले उद्योग का अस्तित्व ही नहीं रहना चाहिए। दुनिया के जो बड़े मीडिया घराने एनएसओ के मैलवेयर जरिए हुई जासूसी की रिपोर्ट छाप रहे हैं, उनमें द गार्जियन भी शामिल हैं। इस खुलासे के मुताबिक एनएसओ कंपनी के बनाए मैलवेयर को हजारों मोबाइल फोन में डाल दिया गया। उसके बाद उस फोन में मौजूद तमाम जानकारियां मैलवेयर डालने वाली एजेंसी के पास पहुंचने लगीं। इनमें ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, कॉन्टैक्ट बुक, लोकेशन डेटा, फोटो और वीडियो शामिल हैं। एनएसओ के मैलवयर में यह क्षमता भी है कि उसके जरिए निशाना बनाए गए फोन के माइक और कैमरा को ऑन या ऑफ किया जा सकता है।
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सस्ते ढंग से हो रही व्यापक निगरानी
स्नोडेन ने कहा कि इस खुलासे से जाहिर हो गया है कि कैसे व्यापारिक उद्देश्यों से बनाए गए मैलवेयर के जरिए तानाशाह सरकारें अपने लोगों की निगरानी कर सकती हैं और उनकी निजता में दखल दे सकती हैँ। स्नोडेन ने कहा- 'परंपरागत पुलिस तरीकों में यह होता था कि अगर किसी के घर या कार या दफ्तर की जांच करनी हो, तो पुलिस को उसके लिए वारंट जारी कराना पड़ता था और फिर उस स्थान पर जाकर तलाशी लेनी पड़ती थी। लेकिन व्यापारिक जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए सस्ते ढंग से व्यापक रूप से लोगों की निगरानी की जा सकती है।'
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आई-फोन के दावे पर भी उठाया सवाल
स्नोडेन ने कहा कि अगर इस टेक्नोलॉजी की बिक्री नहीं रोकी जाती, तो इसके जरिए निशाना सिर्फ 50 हजार लोगों को ही नहीं बनाया जाएगा। ये संख्या पांच करोड़ हो सकती है। और ऐसा बहुत जल्दी हो जाएगा। स्नोडेन ने आई-फोन के इस दावे पर भी सवाल उठाया है कि इस फोन की सिक्युरिटी को भंग नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा- 'जब आप आई-फोन जैसी किसी चीज की बात कर रहे हैं, तो इस कंपनी के फोन में पूरी दुनिया में एक ही सॉफ्टवेयर लोड है। अगर किसी एक आई-फोन को हैक किया जा सकता है, तो उसका मतलब है कि सभी आई-फोन को हैक करने का तरीका ढूंढ लिया गया है।'
आम आदमी इनसे बचाव में असहाय
स्नोडेन ने मोबाइल फोन हैक करने के मैलवेयर बनाने वाली कंपनियों की तुलना किसी ऐसी एजेंसी से की जो दुनिया में संक्रमण फैलाने के लिए लगातार किसी एक वायरस के कई स्ट्रेन तैयार कर रही हो। उन्होंने कहा- 'उनके प्रोडक्ट इंफेक्शन फैलाने वाले हैं। ये कंपनियां वैक्सीन नहीं बनाती हैं। जिस सिर्फ एक चीज का वे कारोबार करती हैं, वह वायरस है।' स्नोडेन ने कहा है कि पेगासस जैसे मैलवेयर इतने शक्तिशाली हैं कि आम आदमी उसे रोकने के लिए कुछ भी कर सकने में असहाय है। इससे अपना बचाव कैसे किया जा सकता है, इस सवाल पर उन्होंने पूछा- 'परमाणु हथियारों से बचने के लिए आम लोग क्या कर सकते हैं?'