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3डी बायो-प्रिंटिंग से बनाए मानव हृदय के हिस्से, दावा- जल्द ही बन सकेगा पूरी तरह काम करने वाला दिल

Sun, 04 Aug 2019 05:08 AM IST
Nilesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Nilesh Kumar Updated Sun, 04 Aug 2019 05:08 AM IST
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Parts of the human heart created with 3D bio-printing,  fully functioning heart will be made
प्रतीकात्मक तस्वीर
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 3-डी बायो-प्रिंटर और अपनी नई तकनीक के जरिए जीवित कोशिकाओं और प्रोटीन से मानव हृदय के विभिन्न हिस्से बनाने में सफलता पाई है। इससे उत्साहित वैज्ञानिकों का दावा है कि निकट भविष्य में पूरे मानव हृदय का निर्माण हो सकेगा। अमेरिका के कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के साइंस पत्रिका में प्रकाशित पेपर में यह दावा किया गया है।
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पेपर के सह-लेखक एडम फेनबर्ग ने कहा कि हमने कोलेजन से 3-डी प्रिंट के जरिये हृदय का वॉल्व बनाया जो काम करता है। कोलेजन प्रोटीन वह तत्व है जो शरीर की लगभग हर अंग व कोशिका के ढांचे में पाया जाता है।
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हृदय के साथ-साथ, मानव शरीर के सभी अंग कुछ विशेष कोशिकाओं से बने होते हैं। इन्हें प्रोटीन का एक बायोलॉजिक ढांचा बांध कर रखता है, जिसे एक्सट्रो सैल्यूलर मैट्रिक्स (ईसीएम) कहा जाता है। इनमें कोलेजन प्रमुख रूप से शामिल है। ईसीएम ही कोशिकाओं को ऐसे बायोकेमिकल संदेश देता है, जिससे कोशिकाएं विभिन्न अंगों को उनका निर्धारित काम करवाती हैं।
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जटिल ढांचा बड़ी दिक्कत

ईसीएम जैसा जटिल ढांचा 3डी प्रिंटिंग कर कोलेजन से बनाना संभव नहीं था। दरअसल, कोलेजन तरल होता है। हृदय का एमआरआई कर उसे जीवित कोशिकाओं और कोलेजन से बनाने पर लिजलिजा अंग बनता है जो उपयोगी नहीं होता। इस पेपर में नई तकनीक ‘फ्रीफॉर्म रिवर्सिबल एम्बेडिंग ऑफ सस्पेंडेड हाइड्रोजेल्स’ (फ्रेश) रखी गई। 

इसमें 3डी प्रिटिंग के समय कोलेजन को परत दर परत जमाया जाता है। हर परत के बीच जेल की सतह लगाई जाती है। जेल सामान्य वातावरण के तापमान में पिघलकर ढांचे से निकल जाता है। कोलेजन बिना किसी नुकसान ठोस हृदय का रूप ले लेता है।

इसी तकनीक से कई अन्य तत्वों को भी 3डी प्रिंट में ढाला जा सकता है। विश्वविद्यालय में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के प्रो. एडम फीनबर्ग के अनुसार फ्रेश तकनीक पर कुछ और अध्ययन होने हैं। यह तकनीक घावों को भरने से लेकर बेकार हो चुके अंग बनाने में काम आ सकती है।

दुनिया को चाहिए 10 लाख हृदय चाहिए

Parts of the human heart created with 3D bio-printing,  fully functioning heart will be made
Artificial heart

रिपोर्ट के अनुसार विश्व में हर वर्ष करीब 10 लाख हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत है। अधिकतर का नंबर अपने देश में बनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में भी नहीं आ पाता। अमेरिका में वेटिंग लिस्ट चार हजार मरीजों की है। भारत में राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम के अनुसार करीब 50 हजार मरीजों को हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत है, लेकिन साल में 10 से 15 ही प्रत्यारोपण हो रहे हैं। ऐसे में कृत्रिम अंग हालात सुधार सकते हैं।

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