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Paris Accord: 'दुनिया में 2030 तक 110 फीसदी अधिक जीवाश्म ईंधन उत्पादन', SEI बोला- पेरिस समझौते का उल्लंघन होगा
Wed, 08 Nov 2023 02:53 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 08 Nov 2023 02:53 PM IST
सार
स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट (SEI) समेत तीन संस्थाओं की तरफ से जारी 'द प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट' के अनुसार, दुनिया पेरिस समझौते का उल्लंघन करने की राह पर है। रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक दुनियाभर में 110 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन का उत्पादन हो सकता है।
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तापमान (सांकेतिक फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आठ साल पहले, साल 2015 में हुई एक अंतरराष्ट्रीय संधि को लेकर दुनियाभर के देश कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2030 तक 110 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन का उत्पादन होने की रिपोर्ट सामने आई है। दुनिया की तीन बड़ी संस्थाओं की तरफ से जारी- 'द प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट' के चौथे संस्करण में कहा गया है कि जीवाश्म ईंधन उत्पादन कानूनी रूस से बाध्यकारी पेरिस समझौते का उल्लंघन होगा।
तेल और गैस के उत्पादन में गिरावट के आसार नहीं
बुधवार को जारी 'द प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट' के चौथे संस्करण में कहा गया है कि दुनिया 2030 तक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की तुलना में 110 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन का उत्पादन करने की राह पर है। उत्पादन का आकलन वार्षिक आधार पर हुआ है। इसके अनुसार, 2030 तक 27 प्रतिशत तेल और 25 प्रतिशत गैस उत्पादन बढ़ेगा। 2050 में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत और 41 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 और 2030 के बीच वार्षिक वैश्विक कोयला उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। निकट भविष्य में भारत, इंडोनेशिया और रूस के नेतृत्व में उत्पादन में वृद्धि होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, "सरकारें 2030 में वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की तुलना में लगभग 110 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन का उत्पादन करने की योजना बना रही हैं।69 प्रतिशत अधिक वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की योजना बना रही हैं।
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बता दें कि 151 देशों की सरकारों ने शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिज्ञा ली थीहै। 2015 में इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर समझौता किया जिसे 'पेरिस समझौता' कहा जाता है। औसत तापमान वृद्धि को 2 डिग्री से नीचे सीमित करने का वादा करने वाले देशों ने सक्रिय रूप से औद्योगिक स्तर पर 1.5 डिग्री का लक्ष्य रखा। हालाँकि, नवीनतम पूर्वानुमानों से पता चलता है कि वैश्विक कोयला, तेल और गैस की मांग इस दशक में चरम पर होगी।
कौन जारी करता है रिपोर्ट
गौरतलब है कि स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट (एसईआई), क्लाइमेट एनालिटिक्स, ई3जी, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) और यूएन एनवायरमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) ने संयुक्त रूप से 'द प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट' जारी की है। इसमें सरकारों के कोयला, तेल और तेल के नियोजित और अनुमानित उत्पादन का आकलन किया जाता है। पेरिस समझौते में तय किए गए तापमान लक्ष्य के अनुरूप वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन के उत्पादन को लेकर जारी रिपोर्ट चिंताजनक है।
इन देशों में कोयला उत्पादन जारी रखने की योजना
रिपोर्ट के मुताबिक "भारत, इंडोनेशिया और रूसी संघ सभी 2030 तक कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की योजना बना रहे हैं। रूसी संघ का लक्ष्य एशिया-प्रशांत और अटलांटिक क्षेत्रों में कोयला उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना है। भारत आत्मनिर्भरता चाहता है और कोयला उद्योग को वर्तमान में देखता है। आय और रोजगार सृजन के नजरिए से यह बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडोनेशिया और कजाकिस्तान उच्च मूल्यवर्धित कोयला-आधारित उत्पादों को विकसित करने के उद्देश्य से कोयले का उत्पादन जारी रखने की योजना बना रहे हैं।
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तेल और गैस के उत्पादन में गिरावट के आसार नहीं
बुधवार को जारी 'द प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट' के चौथे संस्करण में कहा गया है कि दुनिया 2030 तक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की तुलना में 110 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन का उत्पादन करने की राह पर है। उत्पादन का आकलन वार्षिक आधार पर हुआ है। इसके अनुसार, 2030 तक 27 प्रतिशत तेल और 25 प्रतिशत गैस उत्पादन बढ़ेगा। 2050 में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत और 41 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 और 2030 के बीच वार्षिक वैश्विक कोयला उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। निकट भविष्य में भारत, इंडोनेशिया और रूस के नेतृत्व में उत्पादन में वृद्धि होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, "सरकारें 2030 में वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की तुलना में लगभग 110 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन का उत्पादन करने की योजना बना रही हैं।69 प्रतिशत अधिक वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की योजना बना रही हैं।
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बता दें कि 151 देशों की सरकारों ने शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिज्ञा ली थीहै। 2015 में इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर समझौता किया जिसे 'पेरिस समझौता' कहा जाता है। औसत तापमान वृद्धि को 2 डिग्री से नीचे सीमित करने का वादा करने वाले देशों ने सक्रिय रूप से औद्योगिक स्तर पर 1.5 डिग्री का लक्ष्य रखा। हालाँकि, नवीनतम पूर्वानुमानों से पता चलता है कि वैश्विक कोयला, तेल और गैस की मांग इस दशक में चरम पर होगी।
कौन जारी करता है रिपोर्ट
गौरतलब है कि स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट (एसईआई), क्लाइमेट एनालिटिक्स, ई3जी, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) और यूएन एनवायरमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) ने संयुक्त रूप से 'द प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट' जारी की है। इसमें सरकारों के कोयला, तेल और तेल के नियोजित और अनुमानित उत्पादन का आकलन किया जाता है। पेरिस समझौते में तय किए गए तापमान लक्ष्य के अनुरूप वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन के उत्पादन को लेकर जारी रिपोर्ट चिंताजनक है।
इन देशों में कोयला उत्पादन जारी रखने की योजना
रिपोर्ट के मुताबिक "भारत, इंडोनेशिया और रूसी संघ सभी 2030 तक कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की योजना बना रहे हैं। रूसी संघ का लक्ष्य एशिया-प्रशांत और अटलांटिक क्षेत्रों में कोयला उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना है। भारत आत्मनिर्भरता चाहता है और कोयला उद्योग को वर्तमान में देखता है। आय और रोजगार सृजन के नजरिए से यह बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडोनेशिया और कजाकिस्तान उच्च मूल्यवर्धित कोयला-आधारित उत्पादों को विकसित करने के उद्देश्य से कोयले का उत्पादन जारी रखने की योजना बना रहे हैं।