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Bangladesh: बांग्लादेश की हिंसा के बीच भारतीय डॉक्टर्स ने पेश की मिसाल, कहा- हम जिंदगी बचाने के लिए प्रतिबद्ध
Tue, 06 Aug 2024 08:51 PM IST
मिथिलेश नौटियाल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: मिथिलेश नौटियाल
Updated Tue, 06 Aug 2024 08:51 PM IST
सार
बांग्लादेश में जारी हिंसा बीच वहां काम कर रहे भारतीय डॉक्टरों ने कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की है। भारतीय डॉक्टरों ने हिंसा के बीच ढाका में ही रहने का विकल्प चुना है। वे लोगों की जिंदगी बचाने के लिए अस्पतालों में 17 से 18 घंटे काम कर रहे हैं।
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बांग्लादेश में आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा
- फोटो : PTI
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विस्तार
बांग्लादेश में हिंसा का दौर जारी है और इस बीच वहां काम कर रहे भारतीय डॉक्टरों ने कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की है। दरअसल, बांग्लादेश में रह रहे भारतीय डॉक्टरों ने हिंसा के बीच ढाका में ही रहने का विकल्प चुना है। वे वहां रहकर हिंसा पीड़ितों की जान बचा रहे हैं। उधर, भारत में रह रहे इन डॉक्टरों के परिवारों को उनकी सुरक्षा की चिंता सता रही है।
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संसाधनों की कमी के बाद भी लोगों को बचाने में जुटे भारतीय डॉक्टर
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के अस्पतालों में इस समय सैकड़ों लोग भर्ती हैं और इस वजह से डॉक्टरों को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। बांग्लादेश में कार्यरत भारतीय डॉक्टरों ने बताया कि संसाधनों की भारी कमी के बावजूद वे लोगों के इलाज में जुटे हुए हैं। भारतीय डॉक्टरों का कहना है कि वे कर्तव्य की भावना से बंधे हुए हैं और बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच लोगों की मदद करने के लिए अस्पतालों में तत्परता से काम कर रहे हैं।
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‘एक दिन में 17 से 18 घंटे तक काम करना पड़ रहा है’
ढाका एक अस्पताल में काम कर रहे श्रीनगर के एक डॉक्टर ने कहा, ‘बहुत सारे मरीज गोलियों से घायल हुए हैं और कई मरीजों के शरीर पर चाकू के गहरे घाव हैं। सोमवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच ताजा हिंसा में मृतकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यहां संसाधनों की बेहद कमी है और हमें एक दिन में 17 से 18 घंटे तक काम करना पड़ रहा है।’ आपको बता दें कि सोमवार को शेख हसीना के पीएम पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में फिर से हिंसा भड़क गई। इस हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई।
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‘हमने लोगों के जीवन की रक्षा करने की कसम ली है’
उधर, गुजरात के रहने वाले एक अन्य डॉक्टर ने बताया, ‘हमारे माता-पिता हमारी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं लेकिन, हमने लोगों के जीवन की रक्षा करने की कसम ली है। उन लोगों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है और इस मुश्किल समय में अस्पतालों को हमारी आवश्यकता है।’ इन सभी डॉक्टरों ने बांग्लादेश से एमबीबीएस किया है और मौजूदा समय में वहां के अलग अलग अस्पतालों में एक साल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि शेख हसीना के बांग्लादेश से चले जाने के बाद देश में अराजकता की स्थिति पनप गई। हालांकि, भारतीय मूल के डॉक्टरों ने यह भी कहा है कि मंगलवार से स्थिति में थोड़ा सुधार होना शुरू हुआ है। बांग्लादेश में कर्फ्यू हटा दिया गया है और दुकानें और बाजार भी खुल गए हैं।
मंगलवार से स्थिति में सुधार हुआ है
जम्मू-कश्मीर के एक निवासी एक डॉक्टर ने कहा, ‘ताजा हालातों को देखते हुए विदेशी नागरिकों के लिए किसी भी तरह का खतरा नजर नहीं आता। मैं पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कर रहा हूं। मेरी तरह जो इस प्रदर्शन का हिस्सा नहीं हैं, उन्हें सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है। सोमवार तक यहां कानून और व्यवस्था की खराब थी लेकिन, मंगलवार से स्थिति में सुधार होना शुरू हुआ है। हम लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करते हुए देख रहे हैं।’