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कोरोनावायरस: जिद पर अड़ा पाकिस्तान, छात्रों के परिजन सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे
Mon, 17 Feb 2020 10:18 PM IST
संदीप भट्ट
वर्ल्ड डेस्क, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, इस्लामाबाद
Published by: संदीप भट्ट
Updated Mon, 17 Feb 2020 10:18 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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चीन में रह रहे पाकिस्तानी छात्रों के माता पिता और परिवार वाले पाक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। कोरोना वायरस के कहर और चीन में हर रोज़ बढ़ते मौत के आंकड़ों से घबराए और रोते बिलखते ये परिवार वाले नारे लगा रहे हैं कि ‘हमारे बच्चों को वापस लाओ’। लेकिन पाकिस्तान सरकार अपनी जिद पर अड़ी है और परिवार वालों को यह बताने की कोशिश कर रही है कि उनके बच्चे पूरी तरह ठीक हैं और चीनी सरकार बच्चों का पूरा ख्याल रख रही है।
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हुबेई में पाकिस्तान के करीब एक हजार छात्र पढ़ते हैं। कोरोना वायरस फैलने के बाद से ही उनके परिवारवाले सरकार से उन्हें वापस लाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब भारत, बांग्लादेश, नेपाल जैसे तमाम पड़ोसी देश अपने नागरिकों और छात्रों को वापस ला रहे हैं तो पाकिस्तान सरकार ऐसा क्यों नहीं कर रही। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री ज़फ़र मिर्ज़ा ने छात्रों के परिवारवालों से मुलाकात करके उन्हें भरोसा दिलाया है कि सरकार लगातार चीनी अधिकारियों से संपर्क में है और पल पल की खबर ले रही है। मिर्जा ने यह जानकारी भी दी कि 6 पाकिस्तानी नागरिकों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए थे, लेकिन अब वो पूरी तरह स्वस्थ हैं।
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पाकिस्तान के लाहौर और कराची में भी परेशान परिवारवालों ने अपने गुस्से का इजहार किया और सरकार पर असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया। दरअसल पाकिस्तान पहले ही कह चुका है कि वह इस संकट के वक्त में चीन के साथ खड़ा है और अपने नागरिकों को इसलिए वापस नहीं लाएगा ताकि चीन खुद को अकेला न महसूस करे। दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि अगर पाकिस्तान उन्हें वापस ले भी आए तो उसके पास इलाज के लिए उतना कारगर बंदोबस्त ही नहीं है, न कोई सुविधा है, ऐसे में बेहतर है कि चीन में ही वो लोग बेहतर देखभाल में इस संकट का मुकाबला करें।
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कूटनीतिक तौर पर इसे पाकिस्तान की एक दूरगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है ताकि किसी भी संकट की स्थिति में उसे चीन का साथ आगे भी मिलता रहे। लेकिन मानवीय आधार पर देखा जाए तो परिवारवालों के लिए इस वक्त अपने बच्चों की सलामती से बड़ी कोई बात नहीं हो सकती।