फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   parents do not care about their children in Germany people demanding child welfare rights include in constitution

जर्मनी: बच्चों की देखभाल नहीं करते माता-पिता, बाल अधिकारों को संविधान में शामिल करने की मांग

Sat, 19 Sep 2020 02:41 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 19 Sep 2020 02:41 PM IST
विज्ञापन
parents do not care about their children in Germany people demanding child welfare rights include in constitution
जर्मनी में बाल कल्याण अधिकारों को संविधान में शामिल करने पर विचार - फोटो : amar ujala

जर्मनी में ज्यादातर बच्चे अपने माता पिता को छोड़कर सरकारी संरक्षण केंद्रों में जा रहे हैं, जिसके बाद जर्मनी में बाल कल्याण अधिकारों को संविधान में शामिल करने की मांग तेज हो गई है। जर्मनी के युवा कल्याण विभाग ने इसे रोकने के लिए 49,000 बार कदम उठाए हैं लेकिन हालात सामान्य नहीं हुए हैं।

विज्ञापन



युवा कल्याण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी संरक्षण में गए कुल बच्चों में से 17 फीसदी बच्चे बिना माता-पिता के जर्मनी आए शरणार्थी हैं। 14 फीसदी ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें उनके परिवार से देखभाल नहीं मिली, इसके अलावा 12 फीसदी बच्चे घर वालों के साथ बिगड़े संबंध होने की वजह से संरक्षण में आए।
विज्ञापन


वहीं 12 फीसदी बच्चे घरों में पड़ने वाली मार और पिटाई की वजह से सरकारी संरक्षण में आए। इनमें से करीब 20 फीसदी बच्चों में युवा कल्याण अधिकारियों से मदद की मांग की थी। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया था कि सरकारी संरक्षण में आने वाला हर तीसरे बच्चे की उम्र 12 साल से कम थी और हर दसवें बच्चे की उम्र तीन साल से कम थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


रिपोर्ट में बताया गया कि ज्यादातर बच्चे माता-पिता या इनमें से एक या दोनों की ओर से अपनी जिम्मेदारी ना उठा पाने की वजह सरकारी संरक्षण का रुख करते थे। फोरसा सर्वे ने पिछले महीने 10,000 लोगों से इस बारे में सवाल किए थे। इसमें शामिल 71 फीसदी लोगों ने कहा बाल कल्याण अधिकारों को संविधान में शामिल किया जाना चाहिए।


ऐसा करने से बच्चों के कल्याण पर राजनैतिक ध्यान ज्यादा दिया जा सकेगा। इस सर्वे के बाद जर्मनी के कानून मंत्री ने भी बच्चों को अधिकार दिलाने की मांग तेज कर दी है। अब जर्मन सरकार बाल-युवा कल्याण कानून में संशोधन पर विचार कर रही है।नए कानून को लागू करने में 15 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसे तैयार करने के लिए 5,400 वैज्ञानिकों से चर्चा की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed