{"_id":"646ee01bd3a573989f02ea28","slug":"paralysed-man-walks-again-after-12-years-with-brain-implants-digital-bridge-technology-can-transform-world-2023-05-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Brain Implants: अपाहिज व्यक्ति 12 साल बाद फिर चलने लगा! दिमाग में डिजिटल ब्रिज की यह तकनीक बदल सकती है दुनिया","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Brain Implants: अपाहिज व्यक्ति 12 साल बाद फिर चलने लगा! दिमाग में डिजिटल ब्रिज की यह तकनीक बदल सकती है दुनिया
Thu, 25 May 2023 09:42 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 25 May 2023 09:42 AM IST
सार
कई बार रीढ़ की हड्डी या दिमाग में चोट की वजह से ब्रेन-स्पाइन के बीच का यह कनेक्शन टूट जाता है, जिसकी वजह से लोग अपने पैरों पर खड़े होने और चलने-फिरने की ताकत खो देते हैं।
विज्ञापन
डिजिटल तकनीक से 12 साल बाद चला युवक
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तकनीक की वजह से तेजी से दुनिया बदल रही है। अब एक ऐसी तकनीक आई है, जिसके बारे में आपको जानकर सुखद आश्चर्य होगा। बता दें कि नीदरलैंड्स में एक व्यक्ति एक हादसे की वजह से अपाहिज हो गया और चलने फिरने में असमर्थ था। अब वैज्ञानिकों ने ब्रेन इंप्लांट्स की मदद से कुछ ऐसा किया है, जिसकी वजह से वह अपाहिज शख्स ना सिर्फ अपने पैरों पर खड़ा हो पा रहा है बल्कि चल रहा है और सीढ़ियां भी चढ़ रहा है!
विज्ञापन
क्या है डिजिटल ब्रिज तकनीक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्विटजरलैंड में इकोले पॉलीटेक्निक फेडेरल डे लुसाने (EPFL) नामक संस्थान के न्यूरोसाइंटिस्ट ने एक वायरलेस डिजिटल ब्रिज बनाया है, जिसकी मदद से हमारे दिमाग और हमारी स्पाइनल कोर्ड (रीढ़ की हड्डी) के बीच के खोए हुए कनेक्शन को फिर से स्थापित किया जा सकता है।
विज्ञापन
डिजिटल ब्रिज, ब्रेन-स्पाइन के बीच एक इंटरफेस के रूप में काम करता है। कई बार रीढ़ की हड्डी या दिमाग में चोट की वजह से ब्रेन-स्पाइन के बीच का यह कनेक्शन टूट जाता है, जिसकी वजह से लोग अपने पैरों पर खड़े होने और चलने-फिरने की ताकत खो देते हैं। अब डिजिटल ब्रिज तकनीक से फिर से यह कनेक्शन कायम करने में मदद मिली है। इसी का नतीजा है कि 12 साल पहले एक मोटरबाइक हादसे में चलने फिरने की क्षमता खो चुके नीदरलैंड्स के 40 वर्षीय गर्ट जान ओसकाम नामक व्यक्ति फिर से चल फिर पा रहा है।
विज्ञापन
कैसे काम करती है ये तकनीक
इस तकनीक को विकसित करने वाली टीम में शामिल रहे ग्रेगरी कोर्टिने ने बताया कि हमने दिमाग और स्पाइन के बीच एक वायरलेस इंटरफेस बनाया है। इसके लिए ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक की मदद ली गई है, जिससे हमारे विचार, एक्शन में तब्दील हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि तकनीक की मदद से दिमाग स्पाइन के उस क्षेत्र को संदेश भेजेगा, जो हमारे चलने-फिरने के लिए जिम्मेदार है, जिससे इंसान फिर से अपने पैरों पर चल सकेगा।