Pakistan: हादसा नहीं सुनियोजित साजिश थी पाकिस्तानी पत्रकार की हत्या, केन्याई मानवाधिकार आयोग का दावा
एआरवाई टीवी के पूर्व एंकर शरीफ (49 वर्षीय) पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान के नजदीकियों के लिए जाने जाते थे। इस साल के शुरुआत में उनके खिलाफ देशद्रोह आरोप में मामले दर्ज किए थे।
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पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या मामले में केन्या के मानवाधिकार आयोग ने बड़ा खुलासा किया है। आयोग की ओर से कहा गया है कि पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई थी।
केन्याई मानवाधिकार आयोग के वरिष्ठ प्रोग्राम एडवाइजर मार्टिन मावेनजिना ने एक पाकिस्तानी चैनल से कहा कि 23 अक्तूबर को अरशद शरीफ की हत्या की गई थी। चार नवंबर को केन्याई ऑटोप्सी रिपोर्ट में कहा गया कि उन पर करीब से दो गोलियां चलाई गई थीं। केन्याई अधिकारी ने कहा कि इस मामले में यह बड़ा तथ्य है, जो बहुत कुछ इशारा करता है।
सुरक्षा अधिकारियों को अरशद शरीफ के बारे में कैसे पता चला
केन्याई अधिाकरी ने कहा, अरशद शरीफ मामले में कई सवाल उठते हैं। सुरक्षा अधिकारियों को उस विशिष्ट स्थान पर अरशद शरीफ की मौजूदगी का पता कैसे चला? और दावा किया गया कि वह गलत पहचान के बहाने वहां छिप गए थे। उन्होंने कहा, केन्या पुलिस इस मालमे में दोषी है। इस मामले में कहा गया है कि शरीफ जिस वाहन से यात्रा कर रहे थे, वह V8 लैंड क्रूजर थी। यह गाड़ी कैबिनेट सदस्यों, सांसदों और वीआईपी द्वारा उपयोग की जाती है।
शरीफ के हमलावरों को मिली थी ट्रेनिंग
केन्याई वकील और अधिकारी की ओर से दावा किया गया कि शरीफ के हमलावरों को लंबे समय से प्रशिक्षित किया जा रहा था। क्योंकि, आम तौर पर एक चलते वाहन में किसी व्यक्ति पर हेडशॉट लगाना मुश्किल होता है।
इमरान के करीबी थे शरीफ
एआरवाई टीवी के पूर्व एंकर शरीफ (49 वर्षीय) पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान के नजदीकियों के लिए जाने जाते थे। इस साल के शुरुआत में एजेंसियों ने उनके खिलाफ देशद्रोह और राज्य विरोधी नैरेटिव को आगे बढ़ाने के आरोप में मामले दर्ज किए थे। इसके बाद वह देश से छोड़कर भाग गए थे। वह पहले दुबई पहुंचे, फिर लंदन और फिर केन्या।
23 अक्तूबर को हुई थी हत्या
पिछले महीने 23 अक्तूबर को केन्या की राजधानी नैरोबी से मात्र एक घंटे की दूरी पर एक पुलिस चौकी के सामने उनपर गोलियां चलाई गईं थीं। जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना से देश में कोहराम मच गया। केन्याई पुलिस ने बाद में कहा था कि एक बच्चे के अपहरण के मामले में वह इसी तरह की कार की तलाशी ले रही थी और गलत पहचान के कारण उनपर गोलियां चलाईं गईं।