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पाक सरकार ने अपनी अदालत से बोला झूठ कहा-भारत ने नहीं बताया जाधव का वकील
Wed, 07 Oct 2020 03:33 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 07 Oct 2020 03:33 AM IST
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जासूसी के झूठे केस में मृत्यु दंड की सजा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान सरकार अपनी ही अदालत से झूठ बोलने में नहीं चूकी है।
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पाकिस्तान सरकार ने मंगलवार को जाधव को सैन्य अदालत की तरफ से दिए गए मृत्यु दंड की समीक्षा कर रही इस्लमाबाद हाईकोर्ट से कहा कि भारत ने जाधव की पैरवी के लिए वकील नियुक्त नहीं किया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार बार-बार भारत की तरफ से किसी भारतीय वकील को नियुक्त करने की मांग को ठुकरा रही है।
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इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पिछले महीने भारत को जाधव के लिए वकील नियुक्त करने का मौका देने की नई समयसीमा तय की थी। मंगलवार को चीफ जस्टिस अतहर मीनाल्लाह की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
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पीठ को पाकिस्तान कानून मंत्रालय ने कहा कि भारत हाईकोर्ट की तरफ से तय 6 अक्तूबर की समयसीमा तक वकील नियुक्त करने में फेल रहा है। ऐसा दूसरी बार हुआ है।
इसके बाद पीठ ने पाकिस्तान के अटार्नी जनरल खालिद जावेद खान से यह सलाह मांगी कि क्या अदालत भारत की सहमति के बिना जाधव के लिए वकील नियुक्त कर सकती है और ऐसा करने के क्या परिणाम होंगे।
साथ ही यह भी बताने के लिए कहा कि क्या अदालत की तरफ से वकील की नियुक्ति से इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का फैसला प्रभावी तौर पर लागू होगा। अगली सुनवाई 9 नवंबर को रखी गई है।
बता दें कि भारत की तरफ से लगातार किसी भारतीय या क्वींस काउंसल (ब्रिटिश महारानी की कानूनी सेवा के वकील) को नियुक्त करने की इजाजत पाकिस्तान सरकार से मांगी जा रही है।
भारत का कहना है कि ऐसा होने पर ही जाधव के मामले में निष्पक्ष व पारदर्शी सुनवाई हो सकती है। लेकिन पाकिस्तान लगातार भारत की इस मांग को खारिज कर रहा है। पिछले बृहस्पतिवार को भी पाकिस्तान ने भारत का यह आग्रह एक बार फिर ठुकराया है।
50 वर्षीय जाधव भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, जिन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां 2017 में ईरान के चाबहार बंदरगाह से अपहरण करने के बाद पाकिस्तान ले गई थीं और बलूचिस्तान से गिरफ्तार दिखाकर जासूस व आतंकियों का मददगार घोषित कर दिया था।
अप्रैल, 2017 में सैन्य अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुना दी थी। इस सजा के खिलाफ भारतीय अपील पर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने पाकिस्तान को खुली अदालत में दोबारा सुनवाई करने का आदेश दिया था।