Pakistan: पाकिस्तानी मौलवियों ने आतंकवाद की निंदा करते हुए फतवा जारी किया
अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में दारुल उलूम पेशावर और जामिया दारुल उलूम हक्कानिया सहित कई मदरसों से जुड़े मौलवियों ने फतवा जारी किया है, जिसमें राज्य की पुलिस और सेना के खिलाफ हथियार उठाने को शरिया (इस्लामी कानून) में "हराम" (निषिद्ध) बताया गया है।
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पाकिस्तान के जाने-माने मौलवियों ने सोमवार को आतंकवाद और आतंकवादी गतिविधियों की निंदा करते हुए देश भर में आतंकवादियों द्वारा हमलों में बढ़ोतरी के बीच एक फतवा (धार्मिक फरमान) जारी किया।
हर किसी को जिहाद की घोषणा करने का अधिकार नहीं
जियो टीवी की सूचना के मुताबिक, अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में दारुल उलूम पेशावर और जामिया दारुल उलूम हक्कानिया सहित कई मदरसों से जुड़े मौलवियों ने फतवा जारी किया है, जिसमें राज्य की पुलिस और सेना के खिलाफ हथियार उठाने को शरिया (इस्लामी कानून) में "हराम" (निषिद्ध) बताया गया है। उग्रवाद प्रभावित प्रांत के मौलवियों द्वारा जारी फतवे में घोषणा की गई है कि केवल इस्लामिक स्टेट के प्रमुख को "जिहाद" (पवित्र युद्ध) घोषित करने का विशेषाधिकार है। फतवे में कहा गया है कि हर किसी को जिहाद की घोषणा करने का अधिकार नहीं है।
इसमें आगे कहा गया है कि पुलिस और सैन्य कर्मियों के खिलाफ हथियार उठाना शरिया और देश दोनों के खिलाफ है, और जो कोई भी पाकिस्तान के संविधान और कानूनों के खिलाफ विद्रोह करता है, उसे कानून के अनुसार दंड दिया जाएगा।
14 पेज का फतवा किया गया जारी
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना कारी एहसानुल हक, मुफ्ती सुभानल्लाह जान, डॉ मौलाना अताउर रहमान, मौलाना हुसैन अहमद, मुफ्ती मुख्तरुल्लाह हक्कानी, अल्लामा आबिद हुसैन शाकरी और मौलाना अब्दुल करीम सहित विभिन्न विद्यालयों के धार्मिक विद्वानों द्वारा 14 पेज के फतवे पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह फतवा प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) द्वारा विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में सुरक्षा बलों पर हमलों को तेज करने के बाद जारी किया गया है।
दो दिन पहले टीटीपी प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि उनका समूह पाकिस्तान के धार्मिक विद्वानों के "मार्गदर्शन के लिए खुला" है यदि वे मानते हैं कि "हमारे जिहाद की दिशा" गलत है। उसके बाद यह फतवा जारी किया गया।
बता दें कि टीटीपी, जिसका अफगानिस्तान के तालिबान के साथ वैचारिक संबंध है, ने पिछले साल लगभग 100 से अधिक हमलों को अंजाम दिया था। इनमें से अधिकांश हमले अगस्त के बाद हुए, जब टीटीपी समूह की पाकिस्तान सरकार के साथ शांति वार्ता लड़खड़ाने लगी। पिछले साल नवंबर में टीटीपी ने जून 2022 में पाक सरकार के साथ हुए अनिश्चितकालीन संघर्ष विराम को वापस ले लिया था और अपने आतंकवादियों को सुरक्षा बलों पर हमले करने का आदेश दिया था।
माना जाता है कि टीटीपी के अल-कायदा से भी करीबी संबंध हैं। टीटीपी ने पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पीएमएल-एन और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी की पीपीपी के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाने की धमकी दी थी। टीटीपी ने कहा था कि अगर सत्ताधारी गठबंधन उग्रवादियों के खिलाफ सख्त कदम उठाता रहा तो उनके नेताओं को निशाना बनाया जाएगा।