{"_id":"5b17735b4f1c1bb16e8b66c4","slug":"world-bank-said-pakistan-should-accept-indias-proposal","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर बेइज्जत हुआ पाकिस्तान, वर्ल्ड बैंक ने कहा- भारत के प्रस्ताव को करे स्वीकार","category":{"title":"Pakistan","title_hn":"पाकिस्तान","slug":"pakistan"}}
फिर बेइज्जत हुआ पाकिस्तान, वर्ल्ड बैंक ने कहा- भारत के प्रस्ताव को करे स्वीकार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 06 Jun 2018 11:08 AM IST
विज्ञापन
पाक प्रधानमंत्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आतंकी गतिविधियों के लिए दुनियाभर की आलोचना झेल रहा पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेइज्जत हुआ है। किशनगंगा बांध परियोजना मामले में भारत की शिकायत लेकर वर्ल्ड बैंक पहुंचे पाकिस्तान को भारत का प्रस्ताव स्वीकार करने की सलाह मिली है।
विज्ञापन
आपको बता दें कि पाकिस्तान द्वारा इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट में ले जाया गया था, जहां भारत ने एक निष्पक्ष एक्सपर्ट की नियुक्ति का प्रस्ताव दिया था। डॉन न्यूज के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को यह सलाह मान लेनी चाहिए और उसे इस विवाद को ICL ले जाने के फैसले को बदल देना चाहिए।
विज्ञापन
पाकिस्तान का मानना है कि भारत सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करता है।आपको बता दें कि सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी का बंटवारा करने के लिए वर्ल्ड बैंक ने यह समझौता करवाया था। पाकिस्तान की 80 फीसदी कृषि सिंधु नदी के पानी से सींची जाती है। इसलिए पाक मानता है कि बांध बनाने से उसके यहां बहने वाली नदियों का जल स्तर कम हो जाएगा, इसलिए इस मामले की सुनवाई अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में होनी चाहिए।
विज्ञापन
वहीं भारत का कहना है कि सिंधु नदी समझौते से नदी के बहाव या जलस्तर में कोई बदलाव नहीं आएगा। पाकिस्तान से विवाद सुलझाने के लिए एक्सपर्ट नियुक्त किए जाने चाहिए। गौरतलब है कि भारत ने 2007 में पहली बार किशनगंगा पनबिजली परियोजना पर काम शुरू किया था। बाद में पाकिस्तान द्वारा इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने के बाद तीन साल के लिए इस परियोजना पर रोक लगा दी गई। कोर्ट ने 2013 में फैसला दिया कि किशनगंगा प्रॉजेक्ट सिंधु जल समझौते के मुताबिक है और भारत इसके पानी का प्रयोग कर सकता है।