फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   Why rising militant violence in Pakistan?

पाकिस्तान में क्यों बढ़ रही हैं हिंसा की घटनाएं?

Sun, 22 Jun 2014 01:07 PM IST
आकार पटेल/वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
आकार पटेल/वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए Updated Sun, 22 Jun 2014 01:07 PM IST
विज्ञापन
Why rising militant violence in Pakistan?

क्या भारत में चरमपंथी हिंसा में कमी पाकिस्तान में हिंसा में बढोतरी की कीमत पर आई है? कम से कम पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई तो ऐसा ही सोचती है।

विज्ञापन


पिछले हफ्ते मैं पाकिस्तान में था और आईएसआई के जिस रिटायर्ड जनरल से मेरी बात हुई, उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान पाकिस्तान में हिंसा में हुई वृद्धि का एक कारण भारत के खिलाफ सक्रिय चरमपंथी संगठनों को बंद करने का सेना का फैसला भी हो सकता है।
विज्ञापन


वर्ष 2003 में पाकिस्तान में हिंसा बहुत कम थी, जब एक साल में 140 आम लोगों समेत सिर्फ 189 लोग मारे गए थे।

इससे एक साल पहले राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को प्रतिबंधित कर दिया और फिर भारत में होने वाली हिंसा में कमी आने लगी। पाकिस्तान के मामले में उल्टा हुआ और इसी का जिक्र आईएसआई के रिटायर्ड जनरल कर रहे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

हिंसा का गणित

Why rising militant violence in Pakistan?

पाकिस्तान में 2004 में होने वाली मौतों की तादात 863 थी जबकि 2005 में ये 648 रही। इसके बाद, मुशर्रफ की सत्ता के आखिरी साल में एक ऐसा दौर शुरू हुआ जब हिंसा हाथ से निकलती दिखी और मौत के आंकड़े लगातार बढ़ते गए। 2006 में 1471, 2007 में 3598, 2008 में 6715 और 2009 में 11704 लोग मारे गए।

2009 हिंसा के लिहाज से सबसे खतरनाक साल था, इसके बाद वहां मरने वालों की तादात में कमी आई हालांकि ये कमी कोई बहुत बड़ी नहीं थी।

2010 में चरमपंथ से पाकिस्तान में होने वाली मौतों का आंकड़ा 7435 रहा जबकि 2011 में 6303, 2012 में 6211 और 2013 में 5379 लोग मारे गए।

पाकिस्तान में इस साल अब तक 2137 लोग चरमपंथी हिंसा का शिकार बन चुके हैं और ऐसा लगता है कि हिंसा की कमोबेश स्थिति 2011 जैसी ही रहेगी।

क्या करेगा पाकिस्तान?

Why rising militant violence in Pakistan?

मैंने रिटायर्ड जनरल से कहा कि 2009 के बाद से हिंसा में कमी आ रही है। हालांकि कमी की रफ्तार बहुत कम है, ठीक वैसे ही जैसे भारत में हुआ था।

जनरल ने कहा, नहीं, 2009 एक असाधारण वर्ष था। ये वो साल था जब पाकिस्तानी सेना चरमपंथियों का सफाया करने दक्षिणी वजीरिस्तान गई और उसने पूरी तरह इलाके पर नियंत्रण कर लिया।

जनरल ने कहा कि इसी वजह से मरने वालों की संख्या बढ़ी। हालांकि आंकड़े दिखाते हैं कि सीधे तौर पर सैन्य के अभियान में मरने वाले लोगों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम ही थी, ये संभव है कि सैन्य अभियान के चलते ही पाकिस्तान के शहरों में हमलों की संख्या बढ़ गई।

चरमपंथियों ने पलटवार के तौर पर हमलों को अंजाम दिया। इसके बाद के वर्षों में मरने वालों की संख्या में ‘कमी’ को हालात में सुधार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, खास कर 2008 की स्थिति को ध्यान में रखें तो।

पाकिस्तान की सीमाएं

Why rising militant violence in Pakistan?

पाकिस्तान कई वर्षों से चरमपंथी हिंसा के कारण सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। हफ्ते भर पहले पाकिस्तानी सेना ने उत्तरी वजीरिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान शुरू किया है, दुर्भाग्य से इससे भी आने वाले महीनों में हिंसा बढ़ सकती हैं, भले ही ये अस्थाई वृद्धि हो।

इस क्षेत्र में अभियान खासा मुश्किल होगा, खास कर इस इलाके में अल कायदा के सबसे मजबूत लड़ाके मौजूद हैं, यानी वो मध्य एशिया के वो लोग जो कहीं और नहीं जा सकते हैं। अगर 2009 जैसी हिंसा हुई तो पाकिस्तानी के शहरी इलाकों में हमले बढ़ सकते हैं।

आईएसआई के जनरल ने कहा कि भारत में बहुत से लोग इस बात से संतुष्ट होते हैं कि पाकिस्तान अपनी ही मुश्किलों में खुद फंस गया है। मसलन, “आपने समस्या खड़ी की और अब आप खुद ही उसके नतीजे भुगत रहे हो।”

चरमपंथियों पर कार्रवाई

Why rising militant violence in Pakistan?

इस बात को वो बड़े साफ ढंग से कहते हैं कि चरमपंथियों के खिलाफ सैन्य अभियान के फैसले को वापस नहीं लिया जाएगा क्योंकि सेना उन्हें निःसंदेह रूप से दुश्मन मानती है।

दरअसल पाकिस्तानी राष्ट्र के जिन पूर्व प्रतिनिधियों से भी मैं मिला, वो सभी इस बात पर एकमत है कि चरमपंथी दुश्मन हैं। इनमें राजनयिक से लेकर राजनेता और जनरल सभी शामिल हैं। कोई भी अच्छे और बुरे तालिबान की बात नहीं करता है।

जिन भी पाकिस्तानियों की बात मैंने सुनी, वो कहते हैं कि लश्कर-ए-तैयबा और ख़ास तौर से हाफ़िज सईद के सिलसिले में पाकिस्तानी राष्ट्र की कुछ सीमाएं हैं, लेकिन इस बात को इस गुट के प्रोत्साहन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed