फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   why nawaz sharif is silent on 'indian spy'?

'भारतीय जासूस गिरफ्तार, नवाज शरीफ चुप क्यों'

Sun, 27 Mar 2016 02:23 PM IST
अशोक कुमार/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
अशोक कुमार/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली Updated Sun, 27 Mar 2016 02:23 PM IST
विज्ञापन
why nawaz sharif is silent on 'indian spy'?
भारतीय जासूस गिरफ्तार, नवाज शरीफ चुप क्यों? - फोटो : BBC

पाकिस्तान में एक कथित भारतीय जासूस की गिरफ्तारी पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में छाई है और इसके ज़रिए भारत पर फिर बलूचिस्तान में दख़ल देने के आरोप लगाए गए हैं। 'जंग' लिखता है कि पाकिस्तान पहले भी भारत के दखल के ठोस सबूत दे चुका है लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ' के एक बड़े एजेंट की गिरफ्तारी के बाद इस बारे में कोई संदेह नहीं बचा है। अखबार कहता है कि मुल्जिम का नाम कुलभूषण यादव है और आरोप लगाता है कि वो सलीम इमरान के नाम से खुफिया सरगर्मियां कर रहे थे। अखबार का दावा है कि गिरफ्तारी के बाद उन्होंने स्वीकार किया है कि वो भारतीय नौसेना में कमांडर रैंक के अफसर हैं और बलूचिस्तान के अलगाववादी नेताओं से उनके संपर्क हैं।

विज्ञापन


वहीं 'नवा-ए-वक्‍त' ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सचिव सरताज अजीज के इस बयान का ज‌िक्र किया है कि 'रॉ के अफसर की गिरफ्तारी का मामला भारत के साथ उठाया जाएगा।'
विज्ञापन

अखबार कहता है कि पाकिस्तान बनने के बाद से भारत पाकिस्तान में दखलंदाजी करता रहा है और बलूचिस्तान में उसका जासूसी नेटवर्क है जहां से ट्रेनिंग हासिल कर दहशतगर्द बलूचिस्तान ही नहीं बल्कि कराची और दूसरे शहरों में भी घिनौनी कार्रवाई करते हैं। 'एक्सप्रेस' कहता है कि इस बात को ख़ुद 'भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार किया है कि बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग करने में भारतीय सेना का हाथ था, इसलिए बलूचिस्तान में भारत की दख़लंदाजी शक और शुबहे से परे है और इस बात को अब सब जान गए हैं।' अख़बार लिखता है कि हैरानी वाली बात ये है कि अफ़ग़ानिस्तान जैसे छोटे से देश में भारत ने 15 कॉन्सुलेट बना रखे हैं जो उन शहरों में हैं जो पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए हैं। वहीं 'दुनिया' का कहना है कि ये बहुत अजीब है कि भारतीय जासूस की गिरफ़्तारी पर पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से कोई बयान जारी नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


http://ichef.bbci.co.uk/news/ws/624/amz/worldservice/live/assets/images/2016/03/25/160325123327_vikas_swaroop_mea_india_640x360_meaindia_nocredit.jpg
 
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 'कथित जासूस' पहले नौ सेना में काम करते थे, पर अब उनका भारत सरकार से लेना देना नहीं है। अख़बार के मुताबिक़ अब तक न तो प्रधानमंत्री ने मुंह खोला है और न ही गृहमंत्री ने, जबकि ये लोग छोटी छोटी बात पर उछल पड़ते हैं। इसके अलावा 'जसारत' ने पीपल्स पार्टी के सहअध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी के इस बयान पर संपादकीय लिखा है कि अगर भारत में अल्पसंख्यक समुदाय का व्यक्ति राष्ट्रपति बन सकता है तो पाकिस्तान में क्यों नहीं। अख़बार कहता है कि ऐसा इसलिए नहीं हो सकता है कि 1973 में उनके नाना के बनाए संविधान में इसकी गुंजाइश नहीं है।

http://ichef-1.bbci.co.uk/news/ws/624/amz/worldservice/live/assets/images/2015/07/25/150725103558_nawaz_sharif_624x351_getty.jpg
अख़बार लिखता है कि होली पर हिंदुओं को ख़ुश करने के लिए बिलावल ने बेसिर पैर का भाषण दे दिया लेकिन उन्हें तो ये भी नहीं मालूम होगा कि होली क्यों मनाई जाती है और दीवाली क्या होती है।
अख़बार कहता है कि किसी मुलसमान या सिख को राष्ट्रपति बना कर भारत सिर्फ 'निष्पक्षता का ढोंग' करता है क्योंकि वहां राष्ट्रपति के पास कोई शक्ति नहीं होती है, ये पद सिर्फ नुमाइशी होता है।

वहीं ईरानी राष्ट्रपति की पाकिस्तान यात्रा पर 'औसाफ़' ने लिखा है कि ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच दूरियां पैदा करने की कोशिश हो रही है और अमरीका समेत कई देश नहीं चाहते कि पाकिस्तान और ईरान के रिश्ते बेहतर हों।

अख़बार की राय है कि दोनों देशों की लंबी सीमाएं हैं और उनके बेहतर संबंध न सिर्फ दोतरफ़ा रिश्तों को बल्कि इस पूरे क्षेत्र में मौजूद देशों के संबंधों में बेहतरी का रास्ता तैयार कर सकते हैं। रुख़ भारत का करें तो 'जदीद ख़बर' ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर चप्पल फेंके जाने की कोशिश पर संपादकीय लिखा है। अख़बार लिखता है कि इससे पता चलता है कि एक सोच और विचारधारा के साथ चलना होगा और इसका विरोध करने वालों को अपने ही देश में तंग किया जाएगा। कन्हैया को हैदराबाद यूनिवर्सिटी में जाने से रोके जाने पर अख़बार लिखता है कि कन्हैया कुमार इस देश का नागरिक है, देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन नेता है और उसे देश में कहीं भी जाने और भाषण देने का हक हासिल है। अख़बार के मुताबिक कन्हैया पर चप्पल फेंका जाना भी असहनशीलता और असहिष्णुता की मिसाल है। वहीं 'अवधनामा' ने जम्मू कश्मीर में राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री के तौर पर महबूबा मुफ़्ती की ताजपोशी की तैयारियों पर लिखा है कि ये यक़ीक़न एक अच्छी ख़बर है।

अख़बार की राय है कि जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य में लंबे समय तक राज्यपाल का शासन रहना जनता की लोकतांत्रिक आजादी और विकास पर बहुत अच्छे प्रभाव नहीं डालता है। अख़बार लिखता है कि जरूरत इस बात की है कि युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरियां दी जाएं और उन्हें अर्धसैनिक बलों का हिस्सा बनाया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed