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लश्कर मुखिया हाफिज सईद की कुंडली और कारनामों की पूरी कहानी जानिए

अनिल पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Wed, 17 Jul 2019 03:36 PM IST
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आतंकी सरगना हाफिज सईद
आतंकी सरगना हाफिज सईद - फोटो : File Photo
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आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद, भारत की सर्वाधिक वांछित आतंकियों की सूची में शामिल है। 26 नवंबर 2008 (26/11) को मुंबई में हुए आतंकी हमले में भी इसका हाथ था। इस घटना में 166 लोग मारे गए थे। तब भारत ने पाकिस्तान से उसे सौंपने को कहा था। लेकिन पाकिस्तान लगातार सईद को आतंकी मानने से इनकार करता रहा है।
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अमेरिकी सरकार की वेबसाइट रिवार्ड्स फॉर द जस्टिस में भी हाफिज सईद को जमात-उद-दावा, अहले हदीद और लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक बताया गया है। अहले हदीद एक ऐसा इस्लामिक संगठन है जिसकी स्थापना भारत में इस्लामिक शासन लागू करने के लिए की गई है। हाफिज मूलरूप में इंजीनियर है और अरबी भाषा का प्रोफेसर भी रह चुका है।


अमेरिका ने दक्षिण और मध्य एशिया में आतंक के लिए जिम्मेदारी आतंकवादियों की सूची में सईद को दूसरी श्रेणी में रखा है। आइए, आपको हाफिज सईद और उसकी जिंदगी के बारे में कुछ अहम जानकारियों से वाकिफ कराते हैं।
  • पूरा नामः हाफिज मोहम्मद सईद
  • पिता का नामः कमालुद्दीन गुर्जर
  • जन्म तिथिः 10 मार्च 1950
  • जन्मस्थानः सरगोधा, पंजाब, पाकिस्तान
  • राष्ट्रीयताः पाकिस्तानी
  • शिक्षाः इंजीनियरिंग 
अमेरिका ने दुनिया में 'आंतकवाद के लिए जिम्मेदार' लोगों की सूची में भी हाफिज का नाम शामिल किया है। उस पर एक करोड़ डॉलर का इनाम भी रखा गया है। सईद अरबी और इंजीनियरिंग का प्रोफेसर भी रह चुका है। जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगने के बाद उसने एक नया आतंकी इस्लामी संगठन बनाया जिसका मकसद भारत के कुछ हिस्सों और पाकिस्तान में इस्लामी शासन स्थापित करना है। मुंबई आतंकी हमलों में हाफिज की भूमिका को लेकर भारत ने उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कर रखा है, वहीं अमेरिका ने उसे विशेष निगरानी सूची में रखा है।

लश्कर-ए-तैयबा से जमात-उद-दावा

11 सितंबर 2001 में अमेरिका पर हुए हमलों के बाद लश्कर-ए-तैयबा पर दुनिया की नजरें टिकीं और अमेरिका ने लश्कर को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। वर्ष 2002 में पाकिस्तानी सरकार ने भी लश्कर पर प्रतिबंध लगा दिया। उसके बाद हाफिज सईद ने लश्कर-ए-तैयबा का नया नाम जमात-उद-दावा रखा, हालांकि हाफिज सईद इस बात से इनकार करता है कि जमात-उद-दावा का लश्कर से कोई संबंध है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मुंबई आतंकी हमलों के तुरंत बाद दिसंबर 2008 में जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन घोषित किया था। मुंबई हमलों के बाद सईद को अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए छह महीने से कम समय तक नजरबंद रखा गया था। लाहौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसे 2009 में रिहा कर दिया गया था।

पाकिस्तान में भी जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध है लेकिन वह जिहाद के लिए पैसा जुटाता है, उसका प्रमुख हाफिज सईद खुलेआम जिहाद के लिए लोगों को प्रोत्साहित भी करता रहता है।

1985 में जमात-उद-दावा-वल-इरशाद

हाफिज सईद ने अफगानिस्तान में जिहाद का प्रचार करने और लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए 1985 में जमात-उद-दावा-वल-इरशाद की स्थापना की थी। लश्कर-ए-तैयबा को उसकी शाखा बनाया गया था। 1990 के बाद जब सोवियत सैनिक अफगानिस्तान से निकल गए तो हाफिज सईद ने अपने मिशन को कश्मीर की तरफ मोड़ दिया।

इन हमलों के पीछे था सईद का हाथ

  • 5 अगस्त 2015 उधमपुर हमला: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में तीन आतंकियों ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के काफिले पर हमला किया था। इसमें दो जवान शहीद हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मारे गए और एक पाकिस्तानी आतंकी नवेद को गिरफ्तार कर लिया गया था।
  • 27 जुलाई 2015 गुरदासपुर हमला: तीन पाकिस्तानी आतंकियों ने पंजाब के गुरदासपुर जिले में एक थाने पर हमला बोल दिया था। इसमें एक पुलिस कप्तान (सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस) और होमगार्ड के तीन जवान शहीद हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी भी मारे गए थे।
  • 26/11 मुंबई आतंकी हमला: साल 2008 में 26 नवंबर को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकी समुद्री रास्ते से मुंबई में दाखिल हुए और उन्होंने अलग-अलग जगहों पर 164 बेगुनाह लोगों की जान ले ली। इस भीषण हमले में 308 लोग जख्मी भी हुए। हमलावरों में से एक आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। बाद में उन्हें फांसी की सजा दी गई थी।
  • 11 जुलाई 2006 मुंबई ट्रेन विस्फोट: मुंबई की लोकल ट्रेनों में सात सीरियल बम धमाके हुए थे। यह 1993 के बाद मुंबई में हुआ बड़ा आतंकी हमला था। सभी धमाके लोकल ट्रेनों के फर्स्ट क्लास कोच में प्रेशर कुकर में रखे गए थे। जांच के बाद पाया गया कि इस हमले में प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन का हाथ था, जिसमें लश्कर ने प्रमुख रूप से सहयोग दिया था।
  • 29 अक्टूबर 2005 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट: देश की राजधानी दिल्ली में हुए इन सीरियल बम धमाकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने दिल्ली में तीन जगह धमाके किए थे। पहाड़गंज बाजार, सरोजिनी नगर मार्केट और गोविंदपुरी में हुए इन धमाकों में 62 लोग मारे गए थे और करीब 210 घायल हुए थे।
  • 24 सितंबर 2002 अक्षरधाम हमला: लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों ने गुजरात के गांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर पर हमला किया था। इन आतंकियों ने मंदिर में हथियार और हथगोलों से हमला किया था। हमलावरों को एनएसजी के कमांडो ऑपरेशन में मार गिराया गया था। इस हमले में 30 लोग मारे गए थे।
  • 13 दिसंबर 2001 संसद हमला: लश्कर के आतंकियों ने इस दिन देश की संसद पर हमला किया था। दिल्ली पुलिस के जवानों ने बहादुरी से उनका सामना करते हुए पांचों आतंकियों को ढेर कर दिया था। इस कार्रवाई में आठ पुलिसकर्मी भी शहीद हुए थे। हमले को पाकिस्तान में बैठे लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के आकाओं के इशारे पर अंजाम दिया गया था।
  • 22 दिसंबर 2000 को लालकिले पर हमला: लश्कर-ए-तैयबा के छह आतंकियों ने रात में लालकिले पर हमला किया था। इस हमले में सेना दो जवान शहीद हो गए थे और एक अन्य की मौत हो गई थी। हमले के ठीक बाद दिल्ली पुलिस ने जामियागनर में हुए मुठभेड़ में मोहम्मद आरिफ और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया गया था। आरिफ को मौत की सजा सुनाई गई है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
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