मोहम्मद अली जिन्ना शिया थे या सुन्नी? मौत के वक्त हुआ था बड़ा विवाद
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना शिया थे या सुन्नी? जिन्ना के शिया और सु्न्नी होने पर उनकी मौत के वक्त विवाद हुआ था। हालांकि जिन्ना के बारे में कहा जाता है कि धर्म का दखल उनके जीवन में ने के बराबर था।
लेकिन जिन्ना मूलतः इस्माइली थे। इस्माइली आगा खां के फॉलोवर्स होते हैं। मोहम्मद अली जिन्ना का इसी महीने 1948 में निधन हुआ था। जब उनकी मौत हुई तो सवाल उठा कि उन्हें दफ्न शियाओं के तौर-तरीको से किया जाए या सुन्नियों के रीति-रिवाज से।
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हालांकि इस पर सवाल उठने जैसी कोई बात नहीं थी क्योंकि उनके शिया होने को लेकर कोई भ्रम नहीं था।
मौत के बाद शिया या सुन्नी होने पर विवाद
पाकिस्तान के इतिहासकार मुबारक अली ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''दफ्न के वक्त मुस्लीम लीग से जुड़े शब्बीर अहमद उस्मानी नाम के एक मौलवी थे। उन्होंने जिद कर दी कि कायद-ए-आजम की अंत्येष्टि सुन्नी तौर-तरीकों से होनी चाहिए।
विवाद की स्थिति में उनकी अंत्येष्टि में शिया और सुन्नी दोनों तौर-तरीकों को अपनाया गया था।'' मुबारक अली कहते हैं, ''जिन्ना साहब इस्माइली से शिया बन गए थे। इस्माइली 6 इमामों को मानते हैं जबकि शिया 12 इमामों को मानते हैं।
मेरा निजी तौर पर मानना है कि वो भले ही धार्मिक नहीं थे लेकिन उनमें पर्सनल इगो काफी था। दरअसल इस्माइली आगा खां को फॉलो करते हैं लेकिन जिन्ना उन्हें इमाम के तौर पर फॉलो नहीं करना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने खुद को शिया बना लिया।''
धर्म का दखल नहीं
मुबारक अली ने जिन्ना से जुड़े के एक दिलचस्प प्रसंग भी बीबीसी से साझा किया। उन्होंने कहा, ''एक बार उनकी बेगम लंच लेकर आईं। उस वक्त वहां मौजूद लोगों ने कहा कि आपको पता है न कि जिन्ना साहब अब 12 इमामों को मानते हैं।
इस पर उनकी पत्नी जो कि मूल रूप से पारसी थीं, उन्होंने कहा कि जिन्ना साहब जब जो होते हैं मैं भी वैसी ही हो जाती हूं।' मुबारक अली बताते है कि जिन्ना के निजी जीवन में धर्म का बहुत महत्व नहीं था।
भारत के मशहूर इतिहासकार हरबंश मुखिया ने भी बीबीसी से बातचीत में कहा कि वह मूलतः इस्माइली थे। उन्होंने कहा कि जन्म को छोड़ दें तो जिन्ना के निजी जीवन में मजहब बहुत था नहीं।
हरबंश मुखिया ने कहा, ''जिन्ना ने कभी कुरान नहीं पढ़ा। वो शराब पीते थे, सिगार पीते थे और सूअर का मांस खाते थे। वो वैसे भी रहन-सहन में मुस्लिम नहीं थे लेकिन नेता मुसलमानों के थे।''
पाकिस्तान बनाने वाले शिया और अहमदिया
हरबंश मुखिया कहते हैं, ''पाकिस्तान के साथ दो दिलचस्प बाते हैं। जिन्होंने पाकिस्तान की लकीर खींची यानी कहां से कहां तक पाकिस्तान होगा उसकी रूपरेखा पर मुहर लगाने वाले अहमदी थे।
आज की तारीख में अहमदी को पाकिस्तान में गैरमुस्लिम करार दिया गया है। पाकिस्तान के संस्थापक शिया थे और जिन्होंने सीमा खिंचवाई वो अहमदी थे। आज की तारीख में दोनों पाकिस्तान में ठीक स्थिति में नहीं हैं।''
उन्होंने कहा कि जब जिन्ना अविभाजित भारत में थे तब शिया और सुन्नी जैसा कोई मुद्दा नहीं था। मुखिया ने कहा कि उस वक्त हिन्दू बनाम मुस्लिम की बात थी इसलिए लोग जिन्ना के पीछे एक हो गए थे।
जिन्ना कुछ भी छुपकर नहीं करते थे
हरबंश मुखिया ने कहा, ''पाकिस्तान बनने के बाद भी शिया और सुन्नियों का झगड़ा लंबे वक्त तक नहीं हुआ। यह झगड़ा 1958 और 59 में शुरू हुआ था। जिन्ना कुछ भी छुपकर नहीं करते थे। वो शराब पीते थे या पोर्क खाते थे, ये बातें पूरी तरह से सार्वजनिक थीं।'
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उन्होंने कहा, '14 अगस्त 1947 को जिस दिन पाकिस्तान बना तब रमजान का महीना चल रहा था। जिन्ना ने कहा कि ग्रैंड लंच होना चाहिए। लोगों ने उन्हें बताया कि ये रमजान का महीना है कैसे लंच का आयोजन करेंगे। जिन्ना तो ऐसे आदमी थे।'