पाकिस्तान में बनेंगी सैन्य अदालतें !
पाकिस्तानी संसद के निचले सदन ने संदिग्ध चरमपंथियों पर मुकदमा चलाने के लिए सैन्य अदालतों के गठन के पक्ष में मतदान किया है। दिसंबर में पेशावर के आर्मी स्कूल पर हमले के बाद चरमपंथ के विरुद्ध अभियान में तेजी लाने के तहत यह कदम उठाया गया है। दिसंबर का हमला तालिबानी चरमपंथियों ने किया था जिसमें 152 लोग मारे गए थे। मरने वालों में 133 बच्चे शामिल थे।
निचले सदन में पास होने के बाद यह प्रस्ताव अब ऊपरी सदन में भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे कानून का रूप देने के लिए राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने दिसंबर में कहा था कि चरमपंथी हमलों के संदिग्धों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाने से ''चरमपंथी जघन्य कृत्यों की कीमत चुकाएंगे।''
पाकिस्तान में विपक्ष के नेता सैयद खुर्शीद एहमद शाह ने संसद में कहा, ''मैं पहले सैन्य अदालतों के गठन के पक्ष में नहीं था पर पाकिस्तानी नागरिकों की सुरक्षा ही हमारी प्राथमिकता है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह देश के नागरिकों को सुरक्षित रखे।''
सैन्य अदालतों का विरोध
उधर आलोचकों के अनुसार पाकिस्तान में जहां सेना पूर्व में कई बार सत्ता पर काबिज हो चुकी है, वहां सैन्य अदालतें बनाने का मतलब है सेना को और ज्यादा अधिकार देना।
ये भी डर जताया जा रहा है कि इस कदम से बेकसूरों को बिना स्वंत्रत अदालती जांच के सजा या फांसी दे दी जाएगी। पेशावर हमले के बाद पाकिस्तान ने मृत्यदंड पर लगी रोक हटा ली थी।
फजलुल्लाह पर इनाम
पाकिस्तानी तालिबान के नेता मुल्लाह फजलुल्लाह की मौत या उनकी गिरफ़्तारी के एवज़ में क़रीब 60 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की गई है। इस इनामी राशि की घोषणा इमरान ख़ान की पार्टी के नेतृत्व में काम कर रही उत्तर पश्चिमी प्रांत ने की है।
उनके आलोचक उन पर तालिबान के साथ दोस्ताना रिश्ते रखने के आरोप लगाते रहे हैं। इसी के साथ करीब 600 तालिबान चरमपंथी इस समय वॉन्टेड सूची में हैं जिन पर कुल करीब 75 लाख डॉलर का इनाम है।