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ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव: दूसरे दौर के मतदान के बाद आज आएंगे नतीजे; क्या बढ़ेगा अमेरिका का प्रभाव?

Mon, 26 Oct 2026 05:09 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रियो डी जनेरियो।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रियो डी जनेरियो। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 26 Oct 2026 05:09 AM IST
सार

ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के लिए दूसरे दौर का मतदान हो चुका है। मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा को पूर्व राष्ट्रपति के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो चुनौती दे रहे हैं। मुकाबले के नतीजे आज आएंगे। इस चुनाव से ये भी तय होगा कि ब्राजील में अमेरिकी प्रभाव बढ़ेगा या वामपंथी नेतृत्व और मजबूत बनेगा।

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Brazil president election result Luiz Inácio Lula da Silva vs Flávio Bolsonaro mandate after 2nd phase voting
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव, कांटे की टक्कर के बीच नतीजे पर नजरें - फोटो : एएनआई-Brasil 247 / अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ब्राजील में रविवार को राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के लिए मतदान हुआ। इसमें मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच कड़ा मुकाबला है। दोनों उम्मीदवारों को जनवरी में देश का अगला राष्ट्रपति बनने के लिए 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करने होंगे।

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क्या अमेरिका का बढ़ता प्रभाव और मजबूत होगा?

ब्राजील चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि लैटिन अमेरिका में अमेरिका का बढ़ता प्रभाव और मजबूत होगा या वामपंथी नेतृत्व मजबूत रहेगा। मतदान से पहले आए सर्वेक्षणों में दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर दिखाई गई। वामपंथी विचारधारा वाले अनुभवी नेता लूला का मुकाबला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी फ्लावियो बोल्सोनारो से है।

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मतदान अनिवार्य, लेकिन 3.30 करोड़ से अधिक लोगों ने नहीं डाले वोट

फ्लावियो, जेल में बंद ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। इस महीने की शुरुआत में हुए चुनाव के पहले चरण में फ्लावियो ने लूला से 22 लाख से अधिक वोट हासिल किए थे। हालांकि, करीब 16 करोड़ मतदाताओं वाले देश में 3.30 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान नहीं किया था, जबकि ब्राजील में मतदान करना अनिवार्य है।

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देश में वामपंथ बनाम दक्षिणपंथ

अमेरिका के साथ संबंधों, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों पर लूला और फ्लावियो के विचार एक-दूसरे से काफी अलग हैं। फ्लावियो की जीत से लैटिन अमेरिका के सबसे अधिक आबादी वाले देश और उसकी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में दक्षिणपंथी राजनीति मजबूत होगी। यह ऐसे समय हो रहा है, जब चिली, पेरू और कोलंबिया में ट्रंप के सहयोगियों ने जीत दर्ज की है। जबकि, लूला की जीत से ब्राजील और मेक्सिको में वामपंथी नेतृत्व बना रहेगा। चार साल पहले लूला ने जायर बोल्सोनारो को बेहद कम अंतर से हराया था।

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