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तालिबान की बुलेट का जवाब बैलट से
BBC
Updated Sun, 12 May 2013 04:55 PM IST
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शुरू में ही कुछ राजनीतिक दलों को तालिबान की सीधी धमकी, प्रचार के दौरान लगातार हमले और मतदान के दिन भी ख़ून बहाने की धमकी और कोशिशों के बावजूद क्लिक करें पाकिस्तानी वोटर भारी तादाद में मतदान केंद्रों पर पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
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मुख्य चुनाव आयुक्त फ़खरूद्दीन इब्राहिम ने कहा है, "तक़रीबन 60 फ़ीसदी मतदाताओं ने वोटिंग की प्रक्रिया में हिस्सा लिया... मैं आज बहुत ख़ुश हूं। हम सबको ख़ुशी है कि हम इसे कर पाए, ये एक बहुत मुश्किल काम था।"
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पाकिस्तानी तालिबान ने मतदान के दौरान भी आत्मघाती हमलों की धमकी दी थी।
'और हमले करेंगे'
शनिवार को चुनाव शुरू हुए दो घंटे ही हुए थे कि कराची में अवामी नेशनल पार्टी के कार्यालय के बाहर बम धमाका हुआ।
पुलिस ने बीबीसी को बताया कि हमले में 11 लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक घायल हुए।
बाद में तालिबान ने हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल की।
चरमपंथी संगठन के प्रवक्ता एहसानुल्लाह एहसान ने कहा है, "हम बहुत फ़ख़्र के साथ इस हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल करते है, इस हमले को हमने अंजाम दिया है और हम इसी तरह के और हमले करेंगे।"
कराची की घटना मतदान के दिन हुई हिंसा की अकेली घटना नहीं थी।
पेशावर के नवाही क्षेत्र में मतदान केंद्र के बाहर धमाका हुआ, बलूचिस्तान के मच्छ में पॉलिंग स्टेशन पर रॉकेट से फायरिंग हुई।
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हालांकि बलूचिस्तान की घटना में किसी तरह का कोई नुक़सान नहीं हुआ।
चुनाव के दौरान हुए हमलों में कुछ पार्टियों और उनके उम्मीदवारों को हिंसक हमलों का निशाना बनाया गया जिसमें 110 लोगों मारे गए और तीन सौ से ज़्यादा घायल हुए।
तालिबान ने तीन दलों - पाकिस्तान पीपल्स पार्टी, मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट और अवामी नेशनल पार्टी को खुली धमकी थी। उसने आम लोगों से भी वोट न डालने को कहा था।
बावजूद इसके लोग मतदान केंद्रों के बाहर डटे रहे। 'वोटिंग के लिए जाते मारा जाना पसंद'
पेशावर से बीबीसी संवाददाता सबा एतजाज़ का कहना था कि वहां महिला वोटरों की लंबी क़तारें नज़र आईं और इस दक़ियानूसी समाज की औरतों का कहना था कि वो ज़िंदगी में पहली बार चुनाव में हिस्सा ले रही हैं और इसे लेकर बहुत उत्साहित हैं।
बीबीसी के शाजेब जिलानी ने कराची में कई वोटरों को मुल्क में फैली आराजकता और असुरक्षा की भावना को लेकर बातें करते सुना, वो ये कह रहे थे कि यह उनके लिए बहुत बड़ा मुद्दा है।
उनका कहना था कि तटीय शहर में गर्मी के तेज़ होने के बावजूद वोटर वहां डटे रहे। एक युवा वोटर तो गर्मी से बेहोश होकर गिड़ पड़ी।
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'वोट डालने का महफ़ूज़ वक़्त'
पाकिस्तान में बीबीसी उर्दू के संपादक हारून रशीद ने लिखा है कि वोटिंग से एक दिन पहले ही एक पुराने श्रोता ने ट्विटर पर उनसे पूछा कि वोट डालने जाने के लिए सबसे सुरक्षित समय कौन सा है, हालांकि उन्हें ताजुब्ब हुआ कि वो कोई सुरक्षा विशेषज्ञ तो हैं नहीं, लेकिन उन्होंने फिर भी एक वक़्त श्रोता को बता दिया।
हारून रशीद कहते हैं कि तमाम धमकियों के बावजूद पाकिस्तान तालिबान अब भी सार्वजनिक जगहों को निशाना बनाने से कतराते हैं।
चुनाव के दौरान पाकिस्तान में मौजूद रहीं बीबीसी की मुख्य अंतरराष्ट्रीय संवाददाता लिस डुसेट ने कहा कि ये ख़तरे और उसका सामना कर रहे लोगों का संघर्ष था जिसमें लोगों की ही जीत हुई है।