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Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   The rise of islamist parties in pakistan general election 2018

पाकिस्तान चुनाव 2018: मैदान में 1500 से ज्यादा आतंकी

Mon, 23 Jul 2018 06:57 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 23 Jul 2018 06:57 PM IST
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The rise of islamist parties in pakistan general election 2018
pakistan-election
पाकिस्तान चुनाव में जहां नए आयाम गढ़े जा रहे हैं। वहीं आतंकी, कट्टरपंथी इस्लामी और धार्मिक संगठन भी काफी सक्रिय हैं। इसमें वह उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं जिनकी राजनीतिक पार्टी कानूनी तौर पर प्रतिबंधित है। इसमें सबसे आगे 2008 के मुंबई आतंकी हमलों का साजिशकर्ता हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) है, उसके बाद तहरीक ए लब्बैएक पाकिस्तान, अहल-ए- सुन्नत वाल जमात, मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल पार्टियां शामिल हैं। 
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मिली मुस्लिम लीग
नेता- सैफुल्ला खालिद, जिन्हें मुंबई अटैक के मास्टर माइंड हाफिज सईद का समर्थन है।  
कानूनी स्थिति- सैफुल्ला कानूनी तौर से पाकिस्तान में प्रतिबंधित है। उनपर सईद हाफिज के समर्थक होने की वजह से यह प्रतिबंध लगा है। 
चुनावी स्थिति- सैफुल्ला रजिस्टर्ड तो अल्लाह-हु-अकबर तहरीक पार्टी की तरफ से कैंपेन कर रहे हैं। अपने चुनाव प्रचार में वह हाफिज सईद की फोटो का उपयोग कर रहे हैं। 
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कुल उम्मीदवार-260
 नेशनल एसेंबली-73
प्रांतीय चुनाव-187 

तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान
नेता- खादिम हुसैन रिजवी
कानूनी स्थिति- चुनाव आयोग में पंजीकृत
चुनावी स्थिति- उम्मीदवार टीएलपी के बैनर के अंदर लड़ रहा है
उम्मीदवार-566
नेशनल एसेंबली-178 
 प्रांतीय चुनाव-388

अहल-ए-सुन्नत वल जमात
नेता-मौलाना मोहम्मद अहमद लुधियानवी
कानूनी स्थिति- प्रतिबंधित- चूंकि आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी जो अल कायदा और इस्लामिक स्टेट का संगठित समूह है इसलिए यह कानूनी तौर पर पाकिस्तान में प्रतिबंधित है। इनपर आरोप है कि इस संगठन ने हजारों शियाओं की हत्या की जिम्मेदार है।
चुनावी स्थिति- उम्मीदवार राह-ए-हक और निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। 
कुल उम्मीदवार-150

 मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल
नेता- मौलाना फजल-उर-रहमान, सिराजुल हक और अल्लामा साजिद नक्वी
कानूनी स्थिति- लंबे समय से यह चुनाव आयोग में पंजीकृत है। 
चुनावी स्थिति- यह एक धार्मिक संगठन की पार्टी है। इसके अतंगर्त दो पार्टी के बैनर तले अधिकतर उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। साथ ही छोटे-छोटे समूह बी एमएमए गठबंधन के अतंगर्त लड़ रहे हैं। 
उम्मीदवार -595
नेशनल एसेंबली-191
प्रांतीय चुनाव-404

   पिछले पाकिस्तान आम चुनाव में भी  कुछ धार्मिक पार्टियों ने राष्ट्रीय एवं प्रांतीय विधानसभाओं में कुछ सौ उम्मीदवार उतारे थे। वहीं इस चुनाव में उनकी संख्या बढ़कर 1,500 से अधिक हो चुकी है। हालांकि असली समस्या वे नई इस्लामी पार्टियां हैं, जिन पर आतंकियों से संबंध होने के आरोप लगते रहे हैं।
 
तहरीक-ए-लब्बैक नाम की नई पार्टी का नारा ही ‘ईशनिंदा के आरोपियों को मौत मिले’ है। पंजीकृत होने के बावजूद इस पार्टी को उम्मीदवार खड़े करने पर पाबंदी है। फिर भी 566 उम्मीदवार उतारने वाली यह पार्टी पीएमएल-एन को ईशनिंदा का आरोपी बताती है। 

वहीं पीटीआई नेता इमरान खान कहते हैं कि ‘आप मुस्लिम नहीं हो सकते हैं अगर आप यह नहीं मानते कि पैगंबर, हमारे पैगंबर, आखिरी पैगंबर थे। इसलिए इसका समर्थन करना अपने धर्म का समर्थन करना है।’ 

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