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यूएन में अंग्रेजी में भाषण देकर फंसे नवाज शरीफ

Sat, 24 Oct 2015 10:26 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 24 Oct 2015 10:26 PM IST
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Sharif faces contempt case for speaking English at UN

संयुक्त राष्ट्र की 70वीं आम सभा सत्र में अंग्रेजी में भाषण देने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की गई है।

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मीडिया में शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका दर्ज कराते हुए याचिकाकर्ता जाहिद घानी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सर्वोच्च न्यायालय के आठ सितंबर के उस आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें प्रांतीय और संघीय सरकारों को आधिकारिक और अन्य कार्यों के लिए उर्दू का इस्तेमाल करने को कहा गया था।
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याचिकाकर्ता के मुताबिक, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित अन्य देशों के प्रमुखों ने संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को अपनी राष्ट्रीय भाषाओं में ही संबोधित किया। याचिका में कहा गया कि शरीफ ने अपराध किया है, इसलिए उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
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सिर्फ ओबामा की सुनने के लिए बने थे शरीफ

Sharif faces contempt case for speaking English at UN

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के अमेरिका दौरे के बारे में पाकिस्तानी समाचार पत्र का कहना है कि ओबामा से मुलाकात के दौरान ऐसा लग रहा था जैसे शरीफ सिर्फ सुनने के लिए बने थे।

‘द न्यूज इंटरनेशनल’ ने शनिवार को अपने संपादकीय में कहा कि नवाज की व्हाइट हाउस यात्रा पाकिस्तान से अफगानिस्तान के साथ संबंधों में प्रतिबद्धता और अपने क्षेत्र में विभिन्न आतंकी समूहों से लड़ने की प्रतिबद्धता हासिल करना था।

आलोचकों का तर्क है कि इस महत्वपूर्ण मुलाकात से कुछ भी बहुत मूर्त चीज निकल कर नहीं आई है। दूसरी ओर वहां साख का दोहराव, एक साथ काम करने की जरूरत और अन्य टिप्पणियां और बयान थे जो व्यक्त करता है कि इस्लामाबाद के अपने अति महत्वपूर्ण सहयोगी से संबंध कमजोर नहीं हुए हैं।

समाचार पत्र का कहना है कि हालांकि इस विशेष यात्रा से संबंधों में मजबूती को लेकर कुछ ठोस नहीं हुआ।

शरीफ की यात्रा से यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि अमेरिका पाकिस्तान से दूरी बनाने के मूड में नहीं है। वह भी विशेषकर उस समय जब उसे चीन से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

आतंकियों के बीच भेदभाव न करे पाक

Sharif faces contempt case for speaking English at UN

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से दो-टूक अंदाज में कहा है कि आतंकवाद से निपटते समय पाक को आतंकी संगठनों के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए।

व्हाइट हाउस में डिप्टी सिक्रेटरी एरिक शुल्ज ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि ‘शरीफ संग द्विपक्षीय बैठक के दौरान राष्ट्रपति ने सबसे ज्यादा इस बात पर जोर दिया कि पाक आतंकियों के बीच भेदभाव नहीं करे। इस बात को अमेरिका कई बार स्पष्ट कर चुका है, शरीफ के सामने केवल इसे दोहराया गया।’

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान केवल उन्हीं आतंकी संगठनों को निशाना बनाता है जो उस पर हमले करते हैं।

गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को ओबामा और शरीफ के बीच 90 मिनट तक वार्ता हुई थी। शुल्ज के कहा कि ‘वार्ता के दौरान ओबामा ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका पाकिस्तान संग व्यापक और टिकाऊ साझेदारी के प्रति समर्पित है और पाकिस्तान के नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और उसके लोकतंत्र को विकसित होते देखना चाहता है।’

यह भी जोड़ा कि ओबामा और शरीफ दोनों ने माना कि आतंकवाद से अमेरिका और पाकिस्तान को खतरा है और पाकिस्तानी नागरिक आतंकवाद की बड़ी कीमत चुका रहे हैं। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ द्विपक्षीय सहयोग को जारी रखने पर बल दिया।

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