पनामागेट में PAK के SC ने नवाज शरीफ की जांच के लिए JIT के गठन का दिया आदेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पनामा पेपर लीक मामले में घिरे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पाक सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ जेआईटी के गठन का आदेश दिया है। ये जेआईटी हर 15 दिन में कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगी। जेआईटी पूरे मामले की गंभीरता से जांच करेगा।
ऐसी भी चर्चा है कि इस फैसले से शरीफ को पद भी छोड़ना पड़ सकता है और अपनी पार्टी से अंतरिम प्रधानमंत्री का रास्ता चुनना होगा।
इस्लामाबाद में बुधवार को शरीफ की अध्यक्षता में हुई पीएमएल-एन की बैठक में चर्चा की गई कि पार्टी को मध्यावधि चुनाव कराना चाहिए या अंतरिम प्रधानमंत्री चुनना चाहिए जिसमें उम्मीदवार के चयन पर अंतिम फैसला करना होगा। इस पद के लिए शरीफ के दो पसंदीदा उम्मीदवार हो सकते हैं
इनमें शरीफ के दोनों रिश्तेदार ही हैं। शरीफ के ससुराल पक्ष से रिश्तेदार वित्त मंत्री इशाक डार और शरीफ के छोटे भाई तथा पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ इस पद के प्रबल दावेदार हो सकते हैं। पीएमएल-एन के अधिकारियों ने बताया कि वैसे अन्य उम्मीदवारों पर भी विचार किया जा रहा है।
नवाज के परिवार पर विदेश में संपत्ति बनाने का आरोप
नवाज शरीफ का मामला पनामा की कानूनी कंपनी मोजैक फोनसेका से दस्तावेज लीक होने से जुड़ा है। इस दस्तावेज में बताया गया है कि नवाज की उत्तराधिकारी मरियम नवाज सहित उनके बच्चों ने विदेश में लाखों डॉलर की संपत्ति बनाई है। सुप्रीम कोर्ट ने मरियम के वित्तीय स्रोत पर सवाल उठाया है।
पंजाब के कानून मंत्री और मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ के करीबी राणा सनाउल्लाह ने बताया कि पीएमएल-एन को पूरी उम्मीद है कि शीर्ष अदालत का फैसला प्रधानमंत्री को प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि पनामा पेपर लीक मामले में सीधे तौर पर उनका नाम नहीं है और उनके खिलाफ किसी गलत कार्य का सबूत भी नहीं है।
प्रतिकूल फैसले पर चुनाव का विकल्प चुनेगी पार्टी
पीएमएल-एन की बैठक के बाद एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पनामा लीक मामले में यदि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ फैसला आता है तो पार्टी मध्यावधि चुनाव का ही विकल्प चुनेगी। चुनाव का विकल्प चुनने का मकसद यही होगा कि हम इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ को इस हालात का लाभ उठाने नहीं देना चाहेंगे और अगले चुनाव में पीएमएल-एन दोबारा सत्ता हासिल कर लेगी। हालांकि पार्टी का एक गुट मध्यावधि चुनाव के पक्ष में नहीं है।