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चीन-पाक गलियारे पर रूस ने दिया भारत को कूटनीतिक झटका

Mon, 19 Dec 2016 05:54 PM IST
एजेंसी/ इस्लामाबाद
एजेंसी/ इस्लामाबाद Updated Mon, 19 Dec 2016 05:54 PM IST
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Russia throws its weight behind China-Pakistan corridor, keeps India on tenterhooks
सीपीईसी

रूस ने अब सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने की वकालत करते हुए भारत को बड़ा झटका दिया है। उड़ी हमले के बाद भारत चाहता था कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को दुनिया के देशों से अलग-थलग किया जाए, लेकिन रूस ने न सिर्फ चीन पाक आर्थिक गलियारे का समर्थन किया बल्कि यह भी कहा कि उसका इरादा उसके यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन प्रोजेक्ट को इस गलियारे के जोड़ने का भी है। 

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पाकिस्तान में रूस के राजदूत एलेक्सी वाई. देदोव ने यहां तक कहा कि रूस चाहता है कि भारत और पाकिस्तान आपस में मिलकर कश्मीर समेत सभी मुद्दों पर अपने मतभेद मिटाने की पहल करें। पाकिस्तान के मीडिया ‘जिओ’ न्यूज ने इस समाचार को प्रमुखता के साथ ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित किया है। इससे पहले रूस ने अधिकृत रूप से कहा था कि वह चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) प्रोजेक्ट में कोई दिलचस्पी नहीं रखता है। रूस का यह यू-टर्न भारत के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि भारत हमेशा से रूस का पारंपरिक दोस्त रहा है। 
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देदोव ने कहा कि सीपीईसी से न सिर्फ पाक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। दरअसल, सीपीईसी प्रोजेक्ट चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सिल्क रोड आर्थिक बल्ट और 21वें मेरीटाइम सिल्क रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है। चीन चाहता है कि इन दोनों विकास योजनाओं को एशिया और यूरोप के देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ाया जाए। यह प्रोजेक्ट पाक अधिकृत कश्मीर से होकर बलूचिस्तान से गुजरते हुए ग्वादर बंदरगाह तक गया है, जिसका भारत ने विरोध किया है। 

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भारत-रूस संबंधों पर पड़ सकता है असर

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पाकिस्तान स्थित रूसी राजदूत के बयान को भारत-रूस के संबंधों को लेकर अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे दोनों पारंपरिक दोस्तों के बीच अविश्वास की भावना पैदा होगी। इससे पहले रूस और पाकिस्तान के बीच सीपीईस को लेकर गोपनीय बातचीत होने की जानकारी प्रकाश में आई थी। इस पर भारत ने रूस के समक्ष आपत्ति जताई थी और रूस ने आश्वस्त भी किया था।

खटाई में पड़ सकती है भारत की योजना

रूस ने अपना यह रुख पहली बार नहीं दिखाया है। इससे पहले ब्रिक्स सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर पाक को घेरने की भारतीय कोशिशों को भी रूस का समर्थन नहीं मिला था। उधर, सीपीईसी के निर्माण से चीन-पाक के रिश्ते तो मजबूत होंगे ही बल्कि रूस की परियोजना के इसके जुड़ने के बाद पाक और मजबूत होगा। ऐसे में भारत द्वारा उसे दुनिया से अलग-थलग करने की योजना खटाई में पड़ सकती है। 
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