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पाकिस्तान: सरकार ने रचा इतिहास, संसद भंग
Updated Sun, 17 Mar 2013 11:46 AM IST
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पाकिस्तान में प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पाकिस्तान के इतिहास में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाली पहली लोकतांत्रिक सरकार है।
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शनिवार को पांच साल पूरा करने के बाद परवेज़ अशरफ़ की सरकार ने इतिहास रच दिया।
शनिवार की आधी रात को पाकिस्तानी संसद भंग कर दी गई और नए चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है।
प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ ने कहा कि अंतरिम प्रधानमंत्री के चयन के बारे में सभी पार्टियों से विचार विमर्श जारी है।
अंतरिम प्रधानमंत्री की देखरेख में अगले चुनाव होंगे जिसके बारे में उम्मीद है कि मई के महीने में होंगे।
संसद का कार्यकाल समाप्त होने पर शनिवार को अपने अंतिम भाषण में प्रधानमंत्री अशरफ़ ने कहा कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने सब की सहमति से सरकार का गठन किया था और सबकी सहमति से ही सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर रही है।
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इससे पहले पाकिस्तान में जितनी भी लोकतांत्रिक सरकारें बनीं थीं उन्हें फ़ौजी तख़्तापलट का शिकार होना पड़ा था।
मौजूदा सरकार के कार्यकाल पूरा करने को प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र की जीत क़रार देते हुए निष्पक्ष चुनाव कराने का विश्वास दिलाया।
'लोकतंत्र की जीत'
पाकिस्तान टेलीविज़न पर दिए गए अपने भाषण में प्रधानमंत्री अशरफ़ ने कहा, ''पाकिस्तान में लोकतांत्रिक और ग़ैर-लोकतांत्रिक शक्तियों में टकराव का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन लोकतांत्रिक ताक़तों ने आख़िरकार विजय प्राप्त कर ही ली।''
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उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का एहसास है कि उनकी सरकार ने बहुत अच्छा काम नहीं किया और पूरे देश में दूध और शहद की नहरें नहीं बहाईं लेकिन उनके अनुसार उनकी सरकार को विरासत में हर तरफ़ से टूटा हुआ, हारा हुआ और आर्थिक संकट में डूबा हुआ देश मिला था।
प्रधानमंत्री ख़ुद भी भ्रष्टाचार का आरोप झेल रहें हैं उन पर आरोप है कि मंत्री रहते हुए उन्होंने रिश्वत ली थी।
साल 2012 में एक मसले पर तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के बीच मतभेद होने के कारण गिलानी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था जिसके बाद राजा परवेज़ अशरफ़ को प्रधानमंत्री की कुर्सी मिली थी।
अगले कुछ दिनों में अंतरिम सरकार का गठन कर दिया जाएगा जिसकी निगरानी में आम चुनाव होंगे।
फ़िलहाल सत्ताधारी पीपीपी और विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग (नून) की तरफ़ से अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए सिफ़ारिश किए गए नामों को एक दूसरे ने ख़ारिज कर दिया है। लिहाज़ा इस मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है।
लेकिन प्रधानमंत्री परवेज़ अशरफ़ ने विश्वास दिलाया कि इस विषय पर सभी पार्टियों से बातचीत जारी है और जल्द ही इस पर कोई सहमति बन जाएगी।