पीएम मोदी के पत्र पर पाकिस्तान का यू-टर्न, कहा- नहीं दिया बातचीत का कोई प्रस्ताव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान के नवनिर्वाचित विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को शपथ लेने के बाद अपने पहले ही संबोधन में झूठ कहा था। उन्होंने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष इमरान खान को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने शांति वार्ता शुरू करने के प्रति दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि अब खुद उनका मंत्रालय इस बात से मुकर गया है। इससे पहले भारत की तरफ से भी इस दावे को नकारा जा चुका है।
इस मामले पर बवाल होने के बाद भारत सरकार के सूत्रों ने कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में पाकिस्तानी के नए पीएम को बधाई दी थी और उन्होंने बातचीत को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार पत्र में लिखा है कि भारत शांतिपूर्ण पड़ोसी संबंधों और आतंक मुक्त क्षेत्र के लिए प्रतिबद्ध है। इसी शर्त पर भारत पाकिस्तान के साथ बातचीत करने को तैयार है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री के प्रवक्ता का कहना है कि मंत्री ने ऐसा नहीं कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री ने बातचीत का प्रस्ताव दिया है। बल्कि उनका कहना था कि भारतीय पीएम से अपने पत्र में इससे मिलता-जुलता कुछ कहा है। जिसे कि बाद में उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा था कि हमें तर्कसाध्य बातचीत करनी होगी। 18 अगस्त को पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात के दौरान इसी सकारात्मक और तर्कसाध्य बातचीत के बारे में बात की थी।
बता दें कुरैशी ने कहा था, 'भारत के साथ निरंतर और बिना दखलअंदाजी वाली बातचीत की जरुरत है। हम पड़ोसी हैं। लंबे समय से हमारे बीच विवाद चले आ रहे हैं, हम दोनों को ही अपनी परेशानियां मालूम हैं। लेकिन हमारे पास सिवाय बातचीत के कोई और विकल्प नहीं है। हम यहां कुर्सियां तोड़ने नहीं आए हैं।'