समझौता एक्सप्रेस विस्फोट: पाकिस्तान ने फैसले के खिलाफ भारतीय उच्चायुक्त को किया तलब
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पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में आरोपियों के बरी किए जाने विरोध दर्ज कराया है। पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश सचिव ने भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को बुधवार को तलब किया और इस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मामले की धीमी सुनवाई और इस केस की प्रगति पर हमेशा चिंता जताता रहा है। ट्रेन में हुए विस्फोट में निर्दोष लोग मारे गए थे।
Pakistan MoFA (Ministry of Foreign Affairs) statement: Pakistan summons the Indian High Commissioner to register a strong protest and condemnation of the acquittal of all four accused in the Samjhauta terror attacks
— ANI (@ANI) March 20, 2019
समझौता एक्सप्रेस केस में असीमानंद समेत सभी चारों आरोपी बरी
पंचकूला की विशेष एनआईए कोर्ट ने समझौता एक्सप्रेस विस्फोट केस में 12 साल बाद बुधवार को असीमानंद समेत चारों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। असीमानंद के अलावा लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी भी मामले में बरी हो गए हैं। दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में 18 फरवरी, 2007 को हरियाणा के पानीपत के दो बम धमाके हुए थे, जिनमें 16 बच्चों समेत 68 लोग मारे गए थे। मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे।
एनआईए कोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए वकील मोमिन मलिक की ओर से सीआरपीसी की धारा 311 के तहत गवाही के लिए लगाई गई याचिका को भी खारिज कर दिया। केस में 11 मार्च को ही फैसला आने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अंतिम क्षण में नया मोड़ आ गया था। पाकिस्तान की महिला वकील रहिला के मेल को आधार बनाते हुए वकील मोमिन मलिक ने याचिका लगाई थी कि वह इस केस में कुछ प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही करवाना चाहती हैं क्योंकि इस हादसे में उनके पिता की भी मौत हुई थी। लेकिन कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि 12 साल तक ये लोग कहां थे। फैसले के वक्त लगाई गई याचिका मायने नहीं रखती है।
आरोपियों के खिलाफ नहीं मिले सबूत
बचाव पक्ष के वकील मुकेश गर्ग ने बताया कि किसी भी आरोपी के खिलाफ सुबूत नहीं मिले। एनआईए कोई पुख्ता सबूत कोर्ट में पेश नहीं कर पाई। इस मामले के मुख्य आरोपी असीमानंद जमानत पर थे, जबकि लोकेश, कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी अभी जेल में हैं।