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पाक सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री को किया तलब
Updated Sat, 11 Aug 2012 02:59 PM IST
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पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ स्विट्जरलैंड में भ्रष्टाचार के मामले फिर से खुलवाने में असफल रहने पर प्रधानमंत्री रजा परवेज अशरफ को तलब किया है। सर्वोच्च अदालत ने कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा है कि पीएम अशरफ 27 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर बताएं कि अदालत के उस आदेश पर अमल क्यों नहीं किया गया जिसमें राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ केस दोबारा खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को लिखने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट पूर्ववर्ती पीएम यूसुफ रजा गिलानी की ही तरह अशरफ को भी अयोग्य करार दे सकता है। गौरतलब है कि गिलानी ने भी राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खोलने के लिए स्विस सरकार को पत्र लिखने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पीएम पद के लिए अयोग्य करार दे दिया था।
जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने अदालत की अवमानना अध्यादेश 2003 के अनुच्छेद 204 के तहत अशरफ को नोटिस जारी किया। इसका मतलब साफ है कि अदालत पीएम अशरफ को 27 अगस्त को अवमानना का दोषी करार दे सकती है। नोटिस में कहा गया है कि क्यों न अशरफ के खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाए।
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जस्टिस खोसा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अच्छा होगा कि अगली तारीख 27 अगस्त तक मामले में कुछ प्रगति हो जाए अगर ऐसा नहीं हुआ तो अदालत कार्रवाई करेगी। बेंच ने इस बात का भई संज्ञान लिया है कि सरकार लगातार जानबूझकर भ्रष्टाचार के मामले फिर से खोलने के आदेश की अनदेखी कर रही है।
अदालत ने कहा कि इस संबंध में तत्कालीन पीएम यूसुफ रजा गिलानी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के समय ही आदेश जारी किया जा चुका है कि कानून मंत्रालय की सलाह माने बगैर पीएम स्विस अधिकारियों को जरदारी के खिलाफ मामले फिर से खोलने के लिए पत्र लिखें और इस संबंध में विधि विशेषज्ञों से और सलाह-मशविरा न करें। अदालत ने कहा कि गिलानी ने जानबूझकर उसके आदेश पर अमल नहीं किया, इसी लिए उन्हें अयोग्य ठहराया गया, यह देखा जा रहा है कि अशरफ भी उसी नक्शेकदम पर चल रहे हैं।
सारे दांव हुए फेल
पाक के मौजूदा राष्ट्रपति को अदालत की अवमानना से बचाने के सत्तारूढ़ पार्टी पीपीपी के सभी दांव फेल होते नजर आ रहे है। पीपीपी ने जुलाई में अदालत अवमानना कानून 2012 को संसद की मंजूरी इसी उद्देश्य से दिलाई थी कि इसके बाद पाक के मौजूदा पीएम अशरफ महफूज हो जाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं हाल ही में कोर्ट ने इस कानून को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के बाद कानून को अमान्य घोषित कर दिया, हालांकि सरकार ने इस कानून को अमान्य घोषित किए जाने वाले आदेश पर पुनर्विचार की याचिका दायर कर रखी है।
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सुप्रीम कोर्ट पूर्ववर्ती पीएम यूसुफ रजा गिलानी की ही तरह अशरफ को भी अयोग्य करार दे सकता है। गौरतलब है कि गिलानी ने भी राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खोलने के लिए स्विस सरकार को पत्र लिखने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पीएम पद के लिए अयोग्य करार दे दिया था।
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जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने अदालत की अवमानना अध्यादेश 2003 के अनुच्छेद 204 के तहत अशरफ को नोटिस जारी किया। इसका मतलब साफ है कि अदालत पीएम अशरफ को 27 अगस्त को अवमानना का दोषी करार दे सकती है। नोटिस में कहा गया है कि क्यों न अशरफ के खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाए।
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जस्टिस खोसा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अच्छा होगा कि अगली तारीख 27 अगस्त तक मामले में कुछ प्रगति हो जाए अगर ऐसा नहीं हुआ तो अदालत कार्रवाई करेगी। बेंच ने इस बात का भई संज्ञान लिया है कि सरकार लगातार जानबूझकर भ्रष्टाचार के मामले फिर से खोलने के आदेश की अनदेखी कर रही है।
अदालत ने कहा कि इस संबंध में तत्कालीन पीएम यूसुफ रजा गिलानी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के समय ही आदेश जारी किया जा चुका है कि कानून मंत्रालय की सलाह माने बगैर पीएम स्विस अधिकारियों को जरदारी के खिलाफ मामले फिर से खोलने के लिए पत्र लिखें और इस संबंध में विधि विशेषज्ञों से और सलाह-मशविरा न करें। अदालत ने कहा कि गिलानी ने जानबूझकर उसके आदेश पर अमल नहीं किया, इसी लिए उन्हें अयोग्य ठहराया गया, यह देखा जा रहा है कि अशरफ भी उसी नक्शेकदम पर चल रहे हैं।
सारे दांव हुए फेल
पाक के मौजूदा राष्ट्रपति को अदालत की अवमानना से बचाने के सत्तारूढ़ पार्टी पीपीपी के सभी दांव फेल होते नजर आ रहे है। पीपीपी ने जुलाई में अदालत अवमानना कानून 2012 को संसद की मंजूरी इसी उद्देश्य से दिलाई थी कि इसके बाद पाक के मौजूदा पीएम अशरफ महफूज हो जाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं हाल ही में कोर्ट ने इस कानून को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के बाद कानून को अमान्य घोषित कर दिया, हालांकि सरकार ने इस कानून को अमान्य घोषित किए जाने वाले आदेश पर पुनर्विचार की याचिका दायर कर रखी है।