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पाकिस्तान चुनाव: इमरान की पार्टी का सपोर्ट कर रही है सेना, पीएमएल-एन ने लगाया आरोप
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 23 Jul 2018 06:08 PM IST
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पाकिस्तान में मतदान को महज दो दिन शेष रह गए हैं। चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों में जहां सरगर्मी तेज है। इस बार पाकिस्तान चुनाव में कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
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पाकिस्तान में इस बार निष्पक्ष चुनाव की बात की जा रही है और बताया जा रहा है कि करीब 371,000 जवानों को तैनात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना पर आरोप लग रहा है कि वह इमरान खान की पार्टी (पीटीआई) को सपोर्ट कर रही है। जिसका सेना बार-बार खंडन कर रही है। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि देश की चुनावी प्रक्रिया में उनकी ‘कोई सीधी भूमिका’ नहीं है।
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पीएमएल-एन ने सेना पर पार्टी की 'इलेक्शन इंजीनियरिंग' को नाकाम बनाने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सेना के चलते ही शाहबाज, नवाज के स्वागत के लिए एयरपोर्ट तक नहीं पहुंच सके। पंजाब के केयरटेकर सीएम हसन असकारी रिजवी सेना के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। वे पीटीआई कार्यकर्ता बन गए हैं। हालांकि सीएम रिजवी इसे नकारते हुए कहते हैं कि मैंने प्रशासन को कहा है कि वे इलेक्शन में अपनी ड्यूटी प्रोफेशनल और न्यूट्रल होकर करें।
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पाकिस्तान में 25 जुलाई को चुनाव होने हैं।
सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफ्फूर को बार-बार सफाई देनी पड़ रही है और वह कह रहे हैं कि ‘सशस्त्र बल चुनाव के आयोजन में सीधे तौर पर शामिल नहीं है। सेना पर ऐसे आरोप लग रहे थे कि वह मीडिया और सरकार पर चुनाव में हेरफेर करने का दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि मैं साफ तौर पर यह बता देना चाहता हूं कि सशस्त्र बल सिर्फ पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) की मदद करेगा क्योंकि आयोग ने सेना की मदद मांगी है।
सेना पर चुनाव को प्रभावित करने के लग रहे आरोप की कई वजहें हैं। पाकिस्तान की स्थापना के बाद से यहां सेना मजबूत स्थिति में रही है और पाकिस्तान में नीतियां निर्धारण से लेकर प्रशासन पर कब्जा करने में भी इसकी अहम भूमिका रही है। लंबे समय तक यह देश की सत्ता पर काबिज भी रही है। प्रवक्ता ने बताया कि यह पहला मौका नहीं है जब चुनावी प्रक्रिया की देखरेख के लिए सेना तैनात की गई हो।
उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि हम चुनाव से जुड़ी किसी भी तरह की सामग्रियों को अपने पास नहीं रखेंगे। इस तरह के कार्य चुनाव आयोग के कर्मचारी करेंगे। उन्होंने कहा, ‘हमारी शीर्ष प्राथमिकता देश में शांति और सुरक्षा बनाने की है।’
वहीं पाकिस्तानी मीडिया में एक बार फिर सेना पर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया में कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना का दांव उल्टा पड़ गया है। पहले उसने बलूचिस्तान के विद्रोहियों और अलगाववादियों के खिलाफ आतंकियों का इस्तेमाल किया था। आज उन्हीं आतंकियों ने सेना और उसके करीबियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
Honourable Supreme Court of Pakistan has been requested to initiate appropriate process to ascertain the veracity of the allegations levelled against state institutions. pic.twitter.com/wiruWYNZre
— Maj Gen Asif Ghafoor (@OfficialDGISPR) July 22, 2018