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लश्कर को दी छूट और तालिबान से जंग?

Sun, 18 Jan 2015 07:16 PM IST
ओवेन बेनेट-जोंस /बीबीसी
ओवेन बेनेट-जोंस /बीबीसी Updated Sun, 18 Jan 2015 07:16 PM IST
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pakistan intention on Terrorism

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ ने कहा है कि पाकिस्तानी तालिबान के चरमपंथियों के खिलाफ की जा रही फौजी कार्रवाई में किसी भी तरह की ढील नहीं बरती जाएगी। यह कार्रवाई अफगानिस्तान के सीमा से लगे पाकिस्तानी इलाके में की जा रही है। तीन दिनों के लंदन दौरे के दौरान जनरल शरीफ ने कहा, "सैन्य अभियान सर्दियों के दौरान भी जारी रहेगा। ये फैसला पलटा नहीं जाएगा।"

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पाकिस्तानी तालिबान के गढ़ माने जाने वाले उत्तरी वजीरिस्तान के इलाके में फौज की कार्रवाई पेशावर के स्कूल पर हुए हमले पर कहीं पहले पिछली गर्मियों में ही शुरू कर दी गई थी।
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पेशावर के स्कूल पर हमला करके पाकिस्तानी तालिबान चरमपंथियों ने 130 से ज्यादा बच्चों की जान ले ली थी। जनरल शरीफ ने कहा है कि बच्चों के इस नरसंहार के बाद फौज का संकल्प और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद नहीं थी कि वे बच्चों पर हमला करेंगे।"

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पाकिस्तानी तालिबान

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जनरल शरीफ ने ब्रिटेन के रक्षा मंत्री माइकल फैलोन को बताया कि अफगान सीमा इलाके में चरमपंथी अब 'बहुत कम संख्या में' रह गए हैं। लेकिन पेशावर में जानकारों और पत्रकारों का कहना है कि चरमपंथियों के नियंत्रण में अभी भी उत्तरी वजीरिस्तान का एक बड़ा इलाका है और सेना केवल शहरी इलाकों में ही उनका नियंत्रण खत्म कर पाई है।

पाकिस्तान में इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि फौज किस तरह से अपने दुश्मनों को परिभाषित कर रही है। एक ओर वह जहां पाकिस्तानी तालिबान के ख‌िलाफ जंग का एलान किए हुए है वहीं पंजाब सूबे से अपना ऑपरेशन चला रहे चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा को बेरोकटोक अपनी गतिविधियां संचालित करने की छूट है। इसी चरमपंथी गुट पर साल 2008 में मुंबई शहर पर हमला करने के आरोप हैं।

फौज का रवैया

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पाकिस्तानी सेना के अधिकारी निजी बातचीत में दलील देते हैं कि अफगान सीमा के पास जिस पैमाने पर लड़ाई जारी है उसे देखते हुए वे पंजाब सूबे के चरमपंथी गुटों के ख‌िलाफ एक साथ संघर्ष करने की स्थिति में नहीं हैं।

आलोचकों का कहना है कि पंजाब सूबे से सक्रिय इन चरमपंथी गुटों के ख‌िलाफ कार्रवाई करने का फौज का कोई इरादा नहीं है। इनमें से ज्यादातर संगठनों का मकसद भारत को निशाना बनाना है। कुछ इसी तरह की चिंताएं अफगान तालिबान और अफगानिस्तान के हक्कानी नेटवर्क के प्रति पाकिस्तानी फौज के रवैये को लेकर भी जताई जा रही हैं।

साल 2011 में अमरीकी सेना के तत्कालीन ज्वॉयंट चीफ ऑफ स्टाफ माइक मुलेन ने हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी आईएसआई का 'असली साथी' बताया था।

'अच्छे' और 'बुरे' तालिबान के बीच फर्क करने की पाकिस्तानी कोशिशों से जुड़े तमाम सवालों के बावजूद जनरल शरीफ ने जोर दिया कि पाकिस्तान ने अपनी अफगान नीति की समीक्षा की है और वह राष्ट्रपति अशरफ गनी के नेतृत्व में काबुल में एक व्यापक असर वाली सरकार की स्थापना को लेकर प्रतिबद्ध है।

ब्रिटेन ने पाकिस्तान से मांगा सहयोग

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जनरल शरीफ के लंदन दौरे के दौरान पाकिस्तान से सैन्य साजो सामान और ट्रेनिंग पाने की पाकिस्तानी ख्वाहिश के अलावा दोनों देशों के अधिकारियों ने एक दूसरे की जमीन पर मौजूद कुछ लोगों के बारे में सहयोग करने की बात भी उठी है। जनरल ने लंदन में रह रहे बलूच अलगाववादियों के ख‌िलाफ ब्रिटेन से कार्रवाई करने के लिए कहा है।

उधर ब्रिटेन के गृह विभाग के अधिकारियों ने भी राजनीतिक पार्टी एमक्यूएम से जुड़े मुद्दे पर पाकिस्तान से सहयोग मांगा है। पाकिस्तान की नेशनल एसेम्बली में एमक्यूएम के 20 सदस्य हैं और इनमें से ज्यादातर पाकिस्तान के सबसे बड़े और समृद्ध शहर कराची से निर्वाचित होते हैं।

एमक्यूएम के नेता अल्ताफ हुसैन उत्तरी लंदन में 20 साल से भी ज्यादा अर्से से रहे हैं और अतीत में पाकिस्तानी सरकारों की ये शिकायत रही है कि ब्रितानी सरकार इसके हिंसक तौर तरीकों को लेकर आंख बंद किए रहती है। 2010 में एमक्यूएम के नेता इमरान फारूक की लंदन में हत्या कर दी गई थी जिसके बाद से ब्रितानी पुलिस की जांच जारी है।

हिचकिचा रहा पाकिस्तान

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ब्रिटेन पाकिस्तान से मोहसिन अली सईद और मोहम्मद कासिफ खान कामरान को रिहा करने के लिए दबाव बना रहा है। पाकिस्तान में आईएसआई की हिरासत में बंद इन दोनों लोगों के बारे में ब्रिटेन को शक है कि ये इमरान फारूक की हत्या की साजिश में शामिल थे।

दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच गर्मजोशी भरी जितनी भी बातें हो जाएं लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है कि वे एक दूसरे की मदद करेंगे। एक ओर जहां बलूच अलगाववादियों पर ब्रितानी कार्रवाई की गुंजाइश कम ही है वहीं एमक्यूएम के संदिग्धों को सौंपने के मसले पर पाकिस्तान हिचकिचा रहा है। वे जब तक आईएसआई की हिरासत में रहेंगे पाकिस्तानी फौज को एमक्यूएम के सशस्त्र गुटों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती रहेगी।

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