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पाक-ईरान ने की अमेरिका की अनदेखी

Mon, 11 Mar 2013 09:42 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Mon, 11 Mar 2013 09:42 PM IST
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pakistan and iran ignored america at gas pipeline

अमेरिका के विरोध के बावजूद पाकिस्तानी और ईरान दोनों देशों को जोड़ने वाली विवादित गैस पाइपलाइन पर एक कदम आगे बढ़ गए हैं।

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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने सोमवार को इस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का उदघाटन किया।

ईरान में पाइपलाइन का काम करीब-करीब पूरा हो गया है। अब पाकिस्तान में इसके निर्माण की शुरुआत हुई है। अगले दो साल में कुल 780 किलोमीटर पाइपलाइन तैयार की जानी है।

पाकिस्तान में माना जाता है कि ये बहुप्रतीक्षित पाइपलाइन देश के गंभीर ऊर्जा संकट को कम करने मदद कर सकती है।

अमेरिका की परवाह नहीं!
इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर 1994 में बात शुरू हुई थी और शुरुआत में इसे भारत तक गैस सप्लाई करनी थी। लेकिन 2009 में भारत इस समझौते से बाहर हो गया। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि इस प्रोजेक्ट पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
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अमेरिका का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से ईरान ज़्यादा गैस बेचने के काबिल हो जाएगा और उसके परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने की कोशिशें कमज़ोर पड़ जाएंगी। अमेरिका का ये भी कहना है कि पाकिस्तान के ऊर्जा संकट को हल करने के और भी कई तरीके हैं।
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मुद्दा
लेकिन पाकिस्तान में ऊर्जा संकट एक बड़ा मुद्दा बन चुका है और पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वो दबाव के आगे नहीं झुकेगी।

पिछले महीने देश भर में बिजली गुल होने की वजह दक्षिण-पश्चिम प्रांत बलूचिस्तान में एक प्लांट में हुई तकनीकी गड़बड़ी बताई गई। लेकिन इसने देश के सामने मौजूद बिजली संकट की गंभीरता को सामने ला दिया।

ऊर्जा की गंभीर कमी के चलते पाकिस्तान में ‘ब्लैटआउट’ सामान्य बात है और कई इलाकों में दिन में घंटों बिजली गायब रहती है।

पिछले साल पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने कहा था कि पाइपलाइन “पाकिस्तान के हित में” है और “बाहरी तर्कों के बावजूद” इसे पूरा किया जाएगा।

हालांकि बीबीसी वर्ल्ड अफ़ेयर्स के संवाददाता माइक वूलड्रिज कहते हैं पाकिस्तान मानता है कि अशांत प्रांत बलूचिस्तान में से पाइपलाइन का गुज़रना सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।


समृद्ध गैस भंडार वाले राज्य में अलगाववादी स्वायत्तता और खनिज संसाधनों पर ज़्यादा हिस्से के लिए लड़ रहे हैं और वो अक्सर पाइपलाइनों को निशाना बनाते हैं।

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