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अफजल की फांसी के खिलाफ पाक संसद
Updated Fri, 15 Mar 2013 01:06 AM IST
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पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने भारतीय संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के खिलाफ गुरुवार को प्रस्ताव पारित किया है।
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साथ ही कश्मीर पर विशेष संसदीय समिति ने अफजल गुरु के शव को उसके खानदान के हवाले करने की मांग की है।
पाकिस्तानी संसद के निचले सदन में ये प्रस्ताव जमाते-उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान की ओर से पेश किया गया।
प्रस्ताव में अफजल को फांसी दिए जाने की निंदा करने के साथ ही जम्मू-कश्मीर में पैदा हुई स्थिति पर चिंता जताई गई है।
नीति के तहत
इस्लामाबाद में बीबीसी उर्दू के संवाददाता एजाज मेहर के मुताबिक ऐसा कोई प्रस्ताव पहले से तय नहीं था लेकिन सदन के दौरान कश्मीर समिति के सदस्य खड़े हो गए और ये प्रस्ताव रखा जिसका विरोध नहीं किया गया।
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एजाज मेहर के मुताबिक, "संसद में जो कश्मीर की समिति है उसके सदस्य अचानक खड़े हो गए और उन्होंने अपनी बात कहीं। जहां तक पाकिस्तान की सरकार की नीतियों का सवाल है, पाकिस्तान मानता है कि कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और भारत का अंदरूनी मामला नहीं है। ये प्रस्ताव उसी पॉलिसी के तहत है।"
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प्रस्ताव में कहा गया कि भारत प्रशासित कश्मीर में कर्फ्यू के सूरते हाल खत्म किए जाए और वहां के स्थानीय नेताओं को रिहा किया जो जेलों में बंद हैं।
अफजल गुरु
13 दिसंबर, 2001 में भारतीय संसद पर हमले में दोषी करार अफजल गुरू को नौ फरवरी को फॉंसी दे दी गई थी।
भारत के संसद पर हुए हमले में पांच चरमपंथी शामिल थे। इस हमले में नौ लोगों की मौत हुई थी, इनमें सात संसद की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी शामिल थे। जबकि पांचों चरमपंथी जवाबी कार्रवाई में मारे गए थे।
अफजल गुरु पर इन चरमपंथियों को मदद मुहैया कराने का आरोप सही पाया गया था। उन्हें भारी हथियार गोला बारूद के साथ दिल्ली के उनके ठिकाने से गिरफ़्तार किया गया था।
अफजल गुरु जैश-ए-मोहम्मद के चरमपंथी थे। उन्होंने भारत की सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में फॉंसी की सजा सुनाई गई थी।
उन्हें 20 अक्तूबर, 2006 में फांसी की सजा दी जानी थी लेकिन उनकी पत्नी ने राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर की, जिसके चलते अफजल गुरु की फॉंसी टलती रही।