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नवाज़ शरीफ़ का ज़ोर अर्थव्यवस्था पर
Updated Tue, 14 May 2013 07:48 AM IST
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पाकिस्तान के अगले संभावित प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने बीबीसी को दिए विशेष इंटरव्यू में कहा है कि उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना होगा।
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बीबीसी उर्दू से बातचीत में नवाज़ शरीफ ने कहा, “अगर वो अर्थव्यवस्था ठीक कर लेते हैं तो बाकी के सभी मसले भी ठीक हो जाएँगे। इससे पाकिस्तान में हिंसा भी ख़त्म होगी। दहशतगर्दी ख़त्म होगी, बेरोज़गारी और गरीबी ख़त्म होगी। और हमें क्या चाहिए। इसलिए सबसे ज़्यादा तवज्जो अर्थव्यवस्था पर होगी।”
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तालिबान के मुद्दे पर नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि गुट ने बातचीत की पेशकश की है और इसे संजीदगी के साथ लेना चाहिए। उनका कहना था, “बजाए इसके कि पिछली सरकार की तरह इसे रद्दी की टोकरी में फेंक दे, मुझे लगता है कि इस पेशकश को गंभीरता से लेना ज़रूरी है।”
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भारत और अमेरिका के साथ रिश्ते
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पहले भारत जाएँगे या फिर भारतीय प्रधानमंत्री पहले पाकिस्तान आएँगे तो इस पर नवाज़ शरीफ़ का कहना था, “ये कोई अहम का मसला नहीं है कि कौन पहले जाएगा। जो पहले आ सकेगा वो जाएगा, कुछ समय पहले भारतीय प्रधानमंत्री का पाकिस्तान आने का कार्यक्रम था। वो यहाँ आएँगे तो हमें बहुत खुशी होगी। मुझे मौका मिलेगा तो मैं भी जाउँगा। मैं चाहूँगा कि दोनों मुल्क बिगड़े हुए हालात से बाहर निकलें।”
नवाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों पर भी अपनी बात रखी और कहा कि वे ड्रोन हमलों के खिलाफ़ हैं।
उनका कहना था, “अमेरिका से रिश्ते अच्छे रहे हैं। इसमें उतार-चढ़ाव आता रहा है। ये उतार-चढ़ाव क्यूँ आया इस पर ग़ौर करना होगा। एक बात साफ है कि हम ड्रोन हमलों के खिलाफ हैं। अमरीका को हमारी बात ध्यान से सुननी चाहिए क्योंकि ये पाकिस्तान की ख़ुदमुख्तारी से जुड़ा हुआ मसला है।”
दहशतगर्दी और हिंसा
बीबीसी की इस विशेष बातचीत में ये सवाल भी पूछा गया कि इस्लाम के नाम पर हिंसा और आत्मघाती हमलों की समस्या से कैसे निपटा जाएगा।
इस पर नवाज़ शरीफ़ बोले, “जितने भी पक्ष इस समस्या से जुड़े हुए हैं उन सबको मिलकर बैठना होगा। आमने सामने बैठकर अगर मसले हल कर लिए जाएँ तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। पहली कोशिश यही होगी कि बातचीत से मामला हल हो।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या केवल अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने से बाकी समस्याएँ वाकई हल हो जाएँगी तो नवाज़ शरीफ़ का कहना था, “हमें दूसरी बातों पर भी ध्यान देना पड़ेगा। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सोशल सेक्टर के मु्द्दों पर क्रांतिकारी काम करना होगा ताकि पाकिस्तान को पढ़े लिखों का मुल्क समझा जाए। अभी तो बहुत सारे लोग कहते हैं कि ये अनपढ़ों का मुल्क है। स्वास्थ्य सेवाओं को भी बहुत सुधारना पड़ेगा।”
बलूचिस्तान पर नीति
पाकिस्तान चुनाव में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जबकि पीपीपी का प्रदर्शन बहुत ही ख़राब रहा है।
नवाज़ शरीफ़ ने ये भी कहा कि वे इंतकाम की नीति पर नहीं बल्कि सबके साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “कहते हैं कि नीयत के भाग होते हैं। जब चुनावों में नीयत सही रखी है तो चुनाव के बाद नीयत ख़राब क्यों करेंगे। हमने पहले ही कह दिया था कि हम सबके साथ मिलकर चलना जाते हैं। नवाज़ शरीफ़ का प्रधानमंत्री बनना न बनना मायने नहीं रखता असल बात है कि पाकिस्तान को आगे बढ़ना चाहिए।”
बीबीसी के साथ ख़ास इंटरव्यू में नवाज़ शरीफ़ ने बलूचिस्तान में लोगों में फैले गुस्से और नाराज़गी पर भी चर्चा की।
वहाँ की स्थिति को कैसे संभाला जाए इसका जवाब नवाज़ शरीफ़ ने ऐसे दिया, “मुल्क हमारा है और लोग भी हमारे हैं, अगर सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाए तो गले से लगाना चाहिए। कोई नाराज़गी है तो दूर करनी चाहिए और ग़लती हुई है तो उससे सबक सीखना चाहिए।”
नवाज़ शरीफ ने बिजली की किल्लत जैसी घरेलू समस्याओं को हल करने पर भी बात की।