धोखेबाज पाक, मलाला के साथ की 'एक और नाइंसाफी'
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मिरर की एक खबर के मुताबिक पाकिस्तान का धोखेबाज चेहरा एक बार फिर सामने आया है।
जहां एक ओर पकिस्तानी अफसर विजयी मुद्रा में मलाला के ऊपर हमले करने वाले दस में से आठ तालिबानियों को सजा देने और इंसाफ मिलने का दम्भ भरते दिखे थे। वही इस पूरी खबर को सिरे से नकारने वाली खबर सामने आई है।
उसके अनुसार दस मे से आठ नही बल्कि दो को ही सजा हुई है। और उस पर भी ये कि एक बंदी को जिसे पच्चीस साल की सजा हुई थी उसे सजा के एक हफ्ते के अंदर ही गुप्त रुप से रिहा कर दिया गया है।
ये तालिबानी इस पूरे हमले का मास्टरमांइड था। वहीं सूत्रों का कहना है कि ये ट्रायल पूरी तरह से विश्वसनीय नही है क्योंकि ट्रायल के दौरान एक वकील, जज, और आर्मी के अलावा वहां कोई भी अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था।
स्वात घाटी में हुआ था मला पर हमला
खबर के मुताबिक मलाला के पर हमले के सिलसिले में इजहारुल्लाह और इसरार रेहमान नाम के दो तालिबानियों को ही सजा हुई है।
कहा गया कि स्वात घाटी में उस वक्त ये दो लोग ही 9 अक्टूबर 2012 को मलाला पर हमले में शामिल थे। वही पाकिस्तानी अधिकारियो का कहना है कि किसी गलतफहमी और मीडिया की गलत रिपोर्टिंग के चलते ऐसा हुआ।
11 साल की उम्र में स्वाट घाटी की लड़कियो की शिक्षा की पैरवी करते हुए मलाल ने बीबीसी पर एक परिवर्तित नाम से ब्लॉग चलाया था। जिसके तीन साल बाद उस पर हमला हुआ।
इसके बाद विश्व भर मे लोग मलाला के साथ आगे आये और उसका साथ दिया। अमेरिका में लम्बे इलाज के बाद वो स्वस्थ हुई है। इसे पिछले साल 2014 में नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया।