एक गिलास पानी ने दिलाई आसिया को मौत की सजा, रिहाई के बाद पाकिस्तान में हिंसा
पाकिस्तान में ईश निंदा के आरोप में बीते 8 साल से जेल की सजा काटने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी की गलती महज एक गिलास पानी था। उन्हें पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया है। लेकिन उनके बरी होने के बाद से ही देशभर में हंगामा है। लोग सरकार, कोर्ट और सेना के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर चुके हैं।
लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। एक महिला को रिहा करने के कारण अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जजों पर भी गलत टिप्पणियां की जा रही हैं। उन्हें कहा जा रहा है कि वह सच्चे मुसलमान ही नहीं हैं। देश में हिंसा का माहौल है। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक वीडियो जारी किया है।
इस वीडियो में उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की है और कहा है कि फैसला इस्लामी कानून के तहत ही लिया गया है और उसे सभी लोगों को स्वीकार भी करना चाहिए। साथ ही उन्होंने हिंसा फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी है। चलिए आपको बताते हैं कि इस मामले में कब क्या हुआ-
14 जून, 2009
आसिया बीबी का तीन मुस्लिम महिलाओं से विवाद हो गया था। वह लाहौर के शेखपुरा स्थित अपने खेतों में काम कर रही थीं। तेज घूप में काम करने के कारण उन्हें प्यास लगी और उन्होंने कुंए के पास मुस्लिम महिलाओं के लिए रखे पानी के गिलास से पानी पी लिया। मुस्लिम महिलाओं ने इस बात का काफी विरोध किया।
इसके कुछ दिनों बाद मुस्लिम महिलाओं ने विरोध दर्ज कराया कि आसिया ने ईसा मसीह और पैगंबर महोम्मद की तुलना की है। उन्होंने आसिया पर ईश निंदा के तहत मामला भी दर्ज करा दिया। इसके बाद पाकिस्तान पेनल कोर्ट की धारा 295-सी के तहत आसिया को गिरफ्तार किया गया। इस कानून के तहत आरोपी को मौत की सजा सुनाई जाती है।
अब मिला इंसाफ
8 नवंबर, 2010
आसिया बीबी को शेखपुरा की अदालत में पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने का दोषी पाया गया और मौत की सजा सुना दी गई।
17 नवंबर, 2010
पोप बेनेडिक्ट XVI ने आसिया की रिहाई की मांग की और कहा कि पाकिस्तान में ईसाई भेदभाव का शिकार होते हैं।
4 जनवरी, 2011
पंजाब के राज्यपाल सलमान ताहीर की पुलिस बॉडीगार्ड ने हत्या कर दी क्योंकि वह जेल में आसिया से मिलने गए थे। बॉडीगार्ड ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से कहा कि आसिया मौत की हकदार है। आसिया की रिहाई के लिए ताहीर द्वारा दायर याचिका के बाद जरदारी ने केस की समीक्षा करने को कहा।
2 मार्च, 2011
पाकिस्तान के अकेले अल्पसंख्यक मंत्री शाहबाज की हत्या कर दी गई। उनकी हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने निंदा के कानूनों में बदलाव के लिए अभियान चलाया था।
16 अक्तूबर, 2014
लाहौर हाई कोर्ट ने आसिया बीबी की दोषसिद्धि को सही ठहराया और मृत्यु दंड को मंजूरी दे दी।
22 जुलाई, 2015
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मृत्यु दंड की सजा को तब तक के लिए निलंबित कर दिया जब तक अपील की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। मामले में आसिया के खिलाफ कुल 7 गवाह थे।
31 अक्तूबर, 2018
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए आसिया के खिलाफ सुनाए गए फैसले को खारिज किया और रिहाई का फैसला सुनाया।