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जाधव मामला पर पाकिस्तानी मीडिया ने आईसीजे और नवाज सरकार पर निकाला गुस्सा
amarujala.com- Submitted by: आनंद
Updated Fri, 19 May 2017 01:19 PM IST
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कुलभूषण जाधव की फांसी पर इंटरनेशनल कोर्ट के रोक लगाने के बाद पाकिस्तानी मीडिया में सरकार और इंटरनेशनल कोर्ट दोनों की आलोचना की गई। दुनिया अखबार की हेडलाइन है कुलभूषण को फांसी ना दी जाए, इंटरनेशनल कोर्ट खाक। अखबार ने पहले पन्ने पर इस मामले से जुड़ी चार खबरों को जगह दी हैं।
दूसरी खबर है, इंटरनेशनल कोर्ट ने 17 साल पहले भी पाकिस्तान के खिलाफ फैसला दिया। तारीख—ए-इंसाफ ने लिखा कि इंटरनेशनल कोर्ट ने अनुभवहीन वकील चुना। वहीं अंग्रेजी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल ने लिखा कि आईसीजे ने भारतीय जासूस की फांसी पर अंतिम निर्णय होने तक रोक लगाई। एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा कि कुलभूषण जाधव की फांसी पर इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले पर इमरान खान ने नवाज शरीफ को जिम्मेदार ठहराया।
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दूसरी खबर है, इंटरनेशनल कोर्ट ने 17 साल पहले भी पाकिस्तान के खिलाफ फैसला दिया। तारीख—ए-इंसाफ ने लिखा कि इंटरनेशनल कोर्ट ने अनुभवहीन वकील चुना। वहीं अंग्रेजी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल ने लिखा कि आईसीजे ने भारतीय जासूस की फांसी पर अंतिम निर्णय होने तक रोक लगाई। एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा कि कुलभूषण जाधव की फांसी पर इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले पर इमरान खान ने नवाज शरीफ को जिम्मेदार ठहराया।
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विदेश नीति पर सवाल
वहीं अखबारों को दिए गए बयानों में पाकिस्तानी के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने सिर्फ राय दी है और आगे चलकर फैसला पाकिस्तान के हक में आ सकता है। पाकिस्तान के लगभग सभी अखबारों के मुताबिक विपक्षी दलों खासकर पीटीआई और जमात-ए-इस्लामी ने तो सरकार को आड़े हाथों लिया।
वहीं इस मामले पर पाकिस्तान के कई कानूनी जानकारों और दूसरी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के बयान भी अखबारों में छपे हैं। जिसमें बकायदा प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का नाम लेकर कहा गया है कि उनकी टीम अच्छी नहीं थी और वो इंटरनेशनल कोर्ट में अनुभवहीन लोगों को लेकर गए थे।
अखबारों में छपे विपक्षी दलों के बयानों में पाकिस्तान की विदेश नीति को भी नाकाम बताया गया है। और सरकार पर इल्जाम लगाया है कि तैयारी से ना जाने की वजह से फैसला भरत के हक में गया। वहीं पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि अभी फैसला नहीं आया है और जब तक फैसला नहीं आ जाता इसे भारत की जीत नहीं माना जा सकता।
वहीं इस मामले पर पाकिस्तान के कई कानूनी जानकारों और दूसरी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के बयान भी अखबारों में छपे हैं। जिसमें बकायदा प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का नाम लेकर कहा गया है कि उनकी टीम अच्छी नहीं थी और वो इंटरनेशनल कोर्ट में अनुभवहीन लोगों को लेकर गए थे।
अखबारों में छपे विपक्षी दलों के बयानों में पाकिस्तान की विदेश नीति को भी नाकाम बताया गया है। और सरकार पर इल्जाम लगाया है कि तैयारी से ना जाने की वजह से फैसला भरत के हक में गया। वहीं पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि अभी फैसला नहीं आया है और जब तक फैसला नहीं आ जाता इसे भारत की जीत नहीं माना जा सकता।