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पाक बोला- दोनों देशों के हित में है सिंधु जल समझौता

Mon, 20 Mar 2017 10:01 PM IST
amarujala.com- presented by: रोहित कुमार पोरवाल
amarujala.com- presented by: रोहित कुमार पोरवाल Updated Mon, 20 Mar 2017 10:01 PM IST
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Indus water treaty is in favour of both India and Pakistan: Pakistan Minister
- फोटो : File Photo

पाकिस्तान के जल और ऊर्जा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों देशों को सिंधु जल समझौते का सम्मान करना चाहिए क्योंकि यह दोनों ही देशों के लिए उचित है। आसिफ ने यह टिप्पणी भारत पाकिस्तान के बीच सिंधु जल आयोग के दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक के बाद की। बैठक में भारत द्वारा चिनाब नदी पर चल रही तीन परियोजनाओं की डिजाइन को लेकर भारतीय प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की गई।

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पाकिस्तान के जल व ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इस समझौते का सम्मान करते हुए दोनों देशों को समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए। उन्होंने किशनजंगा और रेतल जलविद्युत परियोजनाओं के बारे में भी बात की जिसे लेकर पाकिस्तान विश्व बैंक के मार्फत अंतरराष्ट्रीय अदालत में गया है। ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय अदालत में जाते वक्त किशनजंगा प्रोजेक्ट पर उनकी स्थिति उतनी मजबूत नहीं थी जितनी कि सही समय पर यह कार्रवाई करने से हो सकती थी। लेकिन उन्होंने रेतल परियोजना पर पाकिस्तान की स्थिति को मजबूत बताया।
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भारत-पाक अधिकारियों के बीच सिंधु बेसिन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा के लिए सिंधु जल आयोग की बैठक दो साल के लंबे अंतराल के बाद सोमवार को हुई। बैठक में पाक इलाके में बहने वाली नदी पर भारत द्वारा किए जा रहे तीन परियोजनाओं के निर्माण के बारे में पाकिस्तान ने अपना पक्ष रखा। सिंधु जल आयुक्त पीके सक्सेना के नेतृत्व में 10 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में पाकिस्तान की अगुवाई मिर्जा आसिफ सईद ने की। 

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तीन परियोजनाओं पर पाक की चिंता

Indus water treaty is in favour of both India and Pakistan: Pakistan Minister

पाकिस्तान ने चिनाब नदी पर 1000 मेगावॉट की पकुल डल परियोजना, मियार नाला पर 120 मेगावॉट मियार परियोजना और लोअर कलनाई नाला पर 43 मेगावॉट की लोअर कलनाई जल विद्युत परियोजना को लेकर अपनी चिंताओं से भारतीय प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया। पाकिस्तान ने तर्क दिया कि ये तीनों परियोजनाएं 1960 में भारत-पाक के बीच हुए सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करती हैं, जो दोनों पक्षों के बीच मौजूदा तनाव के चलते गतिरोध में आ गई हैं। यह बैठक स्थायी सिंधु जल आयोग का 113वां सत्र है। इससे पहले आयोग की बैठक 2015 में हुई थी। हालांकि एक अन्य बैठक सितंबर 2016 में होनी थी लेकिन उड़ी आतंकी हमले के बाद उपजे तनाव के चलते उसे रद कर दिया गया था।

7464 करोड़ रु. (नवंबर 2008 के हिसाब से) की लागत से चल रहा है जम्मू-कश्मीर में पकल डल परियोजना पर काम

1125 करोड़ रु. की अनुमानित राशि से हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में चल रहा है मियार जलविद्युत परियोजना पर काम

396 करोड़ रु. की लागत से जम्मू-कश्मीर के लोअर कलनाई क्षेत्र में चल रहा है निर्माण कार्य

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