पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री के रूप में इमरान का इन चुनौतियों से पार पाना होगा मुश्किल
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क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान शुक्रवार को पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री बन गए। राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में भारतीय क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू भी मौजूद थे। साथ ही पाकिस्तान के आर्मी चीफ कमर बाजवा समेत कई नेता मौजूद थे।
इमरान ने 2013 में ‘नया पाकिस्तान’ का नारा दिया था। उन्होंने स्वच्छ सरकार, भ्रष्टाचार विरोधी कानून, स्वतंत्र न्यायपालिका, दुरुस्त पुलिस व्यवस्था और आतंकवाद विरोधी पाकिस्तान पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को कुर्सी छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। अब चूंकि वो देश के नये प्रधानमंत्री बन गए हैं तो उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बेरोजगारी, गरीबी और अर्थव्यवस्था को सुधारना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। साथ ही 'आतंक के पनाहगाह' टैग से निकालकर पाकिस्तान को एक अच्छा राष्ट्र बनाना उनके लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं होगी।
जानकारों की मानें तो पाकिस्तान इस वक्त ऐसे हालात से जूझ रहा है कि इमरान खान को तुरंत ही एक भारी रकम कर्ज लेने की जरूरत होगी। सूत्रों के मुताबिक, सऊदी समर्थित इस्लामिक बैंक पाकिस्तान को 4 अरब डॉलर का कर्ज देने को तैयार है और इमरान ने उसकी सारी औपचारिकताएं भी पहले ही पूरी कर ली है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि वो इस कर्ज को चुकाएंगे कैसे, जबकि देश में कहीं भी आय का कोई स्रोत नजर नहीं आता।
हाल ही में पाकिस्तान के संभावित वित्त मंत्री ने कहा था 'देश के हालात काफी खराब हैं। केंद्रीय बैंक के पास महज 10 अरब डॉलर यानी करीब 70 हजार करोड़ रुपये शेष बचे हैं। उम्मीद है कि हमें कहीं से भी 8-9 अरब डॉलर का कर्ज मिल जाएगा। हालांकि इसके बाद भी जरूरतें पूरी करना नामुमकिन है।'
आईएमएफ से कर्ज मिलना आसान नहीं
पाकिस्तान अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज ले सकता है, लेकिन चूंकि कर्ज लेने के बाद चुकाने के मामले में पाकिस्तान की छवि पहले से ही खराब है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से उसे कर्ज मिलना आसान नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही आईएमएफ को चेतावनी दे दी है कि पाकिस्तान को अगर कर्ज दिया जाता है तो यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि उसका इस्तेमाल चीन से लिए कर्ज को चुकाने में न हो।
अमेरिकी अधिकारियों की मानें तो चीन विकासशील देशों, खासकर अपने पड़ोसियों को खुले मन से कर्ज दे रहा है, ताकि कर्ज न चुका पाने की स्थिति में उनमें नियंत्रण किया जा सके। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1980 से लेकर अब तक पाकिस्तान आईएमएफ से 12 बार कर्ज ले चुका है।
पाकिस्तान के लिए चीन से निपटना बड़ी चुनौती
व्यापारिक असंतुलन से जूझ रहे पाकिस्तान को आखिर इमरान खान कैसे निकालेंगे, यह देखने वाली बात होगी। पाकिस्तान के व्यापारिक घाटे में चीन की सबसे ज्यादा भूमिका है। देश में आयात लगातार बढ़ रहा है, जबकि निर्यात काफी कम है। इसे बढ़ाने के लिए इमरान को कुछ खास सोचना होगा, क्योंकि अगर पिछले वित्तीय वर्ष को देखा जाए तो यहां आयात 60.898 अरब डॉलर पहुंच गया था।
इसके अलावा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी बन रहा है, जिसके लिए चीन ने पहले ही पाकिस्तान को काफी कर्ज दे रखा है, जबकि अमेरिका हमेशा से इसका विरोध करता आ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान इस वक्त काफी दबाव में है और इमरान खान को इन सभी चुनौतियों से पार पाना होगा।
बेकार के खर्चों पर लगानी होगी रोक
इमरान खान के लिए एक और बड़ी चुनौती होगी बेकार के खर्चों पर रोक लगाना, क्योंकि एक तो पाकिस्तान कर्ज के भरोसे ही चल रहा है और ऊपर से मेहमान नवाजी और फिजूल की चीजों पर बहुत ज्यादा खर्च करता है।
चुनाव जीतने के बाद इमरान खान ने सांसदों से अपील भी की थी कि वो बेकार के खर्चों पर लगाम लगाएं। इसके अलावा उन्होंने उस समय प्रधानमंत्री आवास लेने से भी मना कर दिया था। उन्होंने कहा था 'हम प्रधानमंत्री आवास का क्या करेंगे? इस बंगले में रहने में मुझे शर्म महसूस होगी, इसलिए इसे शैक्षिक संस्थान या लोगों के कल्याण के लिए किसी संस्था में तब्दील कर दिया जाए।'
हालांकि बाद में उन्होंने फिर सरकारी बंगले में ही रहने की बात कही है। अब देखना होगा कि वो अपने सांसदों की फिजूलखर्ची पर रोक कैसे लगाते हैं और देशहित में काम कैसे करते हैं?