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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने इमरान खान को चुना मुल्क का वजीर-ए-आजम, शनिवार को लेंगे शपथ
भाषा, इस्लामाबाद
Updated Fri, 17 Aug 2018 06:42 PM IST
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इमरान खान
पाकिस्तानी संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में हुए एकतरफा चुनाव में शुक्रवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान खान को देश का नया प्रधानमंत्री चुना गया। इमरान ने इस मुकाबले में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के प्रमुख शाहबाज शरीफ को मात दी।
इमरान शनिवार को पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे।
नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर ने ऐलान किया कि क्रिकेटर से नेता बने 65 वर्षीय इमरान को 176 वोट मिले जबकि उनके एकमात्र प्रतिद्वंद्वी और पीएमएल-एन के प्रमुख शाहबाज शरीफ को 96 वोट मिले।
बिलावल भुट्टो जरदारी की अगुवाई वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), जिसके पास 54 सीटें हैं, के मतदान में हिस्सा नहीं लेने के फैसले के बाद 15वीं नेशनल असेंबली में चुनाव महज एक औपचारिकता रह गई थी। शरीफ की उम्मीदवारी को लेकर पीपीपी और पीएमएल-एन के बीच मतभेद उभर आए थे।
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नतीजों की घोषणा के बाद पीएमएल-एन के सांसदों ने इमरान के खिलाफ नारे लगाए और सदन में विरोध प्रदर्शन किया।
सरकार बनाने के लिए नेशनल असेंबली, जिसमें 342 सदस्य हैं, में कुल 172 वोटों की जरूरत होती है।
अलग-अलग उम्मीदवारों के लिए बनाई गई अलग-अलग दीर्घा में सदस्यों के मत विभाजन के जरिए खुले में वोटिंग हुई। पीपीपी के सांसद वोटिंग प्रक्रिया के दौरान बैठे रहे। जमात-ए-इस्लामी ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
सूत्रों ने बताया कि शरीफ के पक्ष में वोट के लिए पीपीपी को मनाने की आखिरी कोशिश करते हुए पीएमएल-एन के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्पीकर अयाज सादिक पीपीपी प्रमुख बिलावल की सीट तक गए और अनुरोध किया कि वह वोटिंग से दूर रहने के अपने फैसले को बदलें।
खुद शरीफ ने भी बिलावल को मनाने की कोशिश की। लेकिन बिलावल वोटिंग से दूर रहने के फैसले पर डटे रहे।
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इमरान शनिवार को पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे।
नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर ने ऐलान किया कि क्रिकेटर से नेता बने 65 वर्षीय इमरान को 176 वोट मिले जबकि उनके एकमात्र प्रतिद्वंद्वी और पीएमएल-एन के प्रमुख शाहबाज शरीफ को 96 वोट मिले।
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बिलावल भुट्टो जरदारी की अगुवाई वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), जिसके पास 54 सीटें हैं, के मतदान में हिस्सा नहीं लेने के फैसले के बाद 15वीं नेशनल असेंबली में चुनाव महज एक औपचारिकता रह गई थी। शरीफ की उम्मीदवारी को लेकर पीपीपी और पीएमएल-एन के बीच मतभेद उभर आए थे।
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नतीजों की घोषणा के बाद पीएमएल-एन के सांसदों ने इमरान के खिलाफ नारे लगाए और सदन में विरोध प्रदर्शन किया।
सरकार बनाने के लिए नेशनल असेंबली, जिसमें 342 सदस्य हैं, में कुल 172 वोटों की जरूरत होती है।
अलग-अलग उम्मीदवारों के लिए बनाई गई अलग-अलग दीर्घा में सदस्यों के मत विभाजन के जरिए खुले में वोटिंग हुई। पीपीपी के सांसद वोटिंग प्रक्रिया के दौरान बैठे रहे। जमात-ए-इस्लामी ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
सूत्रों ने बताया कि शरीफ के पक्ष में वोट के लिए पीपीपी को मनाने की आखिरी कोशिश करते हुए पीएमएल-एन के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्पीकर अयाज सादिक पीपीपी प्रमुख बिलावल की सीट तक गए और अनुरोध किया कि वह वोटिंग से दूर रहने के अपने फैसले को बदलें।
खुद शरीफ ने भी बिलावल को मनाने की कोशिश की। लेकिन बिलावल वोटिंग से दूर रहने के फैसले पर डटे रहे।