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अटल जी के निधन को पाकिस्तानी मीडिया ने कैसे कवर किया

Sat, 18 Aug 2018 05:31 PM IST
Trainee Trainee वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 18 Aug 2018 05:31 PM IST
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How Pakistani media covered former prime minister of india Atal Bihari vajpayee demise news
डॉन अखबार में अटल जी के निधन की खबरे पहले पन्ने पर प्रकाशित हुई - फोटो : Dawn
भारत पाकिस्तान के बीच दीर्घकालिक शांति कायम करने के लिए दोनों देशों को वार्ता की मेज पर लाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी का अथक प्रयास जगजाहिर हैं। जब वाजपेयी बस में लाहौर गए थे तो उनके इस कदम को भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा गया था और इसे खूब सराहा गया था। गुरुवार 16 अगस्त को अटल जी ने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आखिरी सांस ली।
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पाकिस्तान में अटल बिहारी वाजपेयी की लोकप्रियता इस बात से साफ हो जाती है जिस तरह से उस देश के मीडिया ने उनके निधन की खबर को कवर किया। अटल जी के निधन के बारे में पाकिस्तान के टीवी चैनलों, अखबारों और न्यूज वेबसाइटों पर प्रमुख रूप से रिपोर्ट प्रकाशित हुईं। इनमें से कुछ में वाजपेयी जी को 'महान राजनेता' के रूप में वर्णित किया गया, तो कुछ में उनके निधन को 'अपूरनीय क्षति' बताया गया। 
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पाकिस्तानी मीडिया ने अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में यह कहा : 

डॉन

पाकिस्तान के सबसे सम्मानित अखबारों में से एक 'द डॉन' ने पूर्व भारतीय प्रधान मंत्री की शांति पहल को उजागर करते हुए शीर्षक लिखा, 'पाकिस्तान के साथ शांति के पक्षधर वाजपेयी जी का निधन'। 
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खबर में कहा गया कि वाजपेयी को पाकिस्तान में शांति कायम करने वाले एक ईमानदार नेता के रूप में पूजा गया और अपने देश में विरोध उनकी 'गलत पार्टी में एक सही व्यक्ति' कहकर प्रशंसा करते थे। 



एक्सप्रेस ट्रिब्यून

पाकिस्तान के एक अन्य बड़े अंग्रेजी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर को पहले पन्ने पर प्रकाशित किया। 

अखबार ने लिखा, "वाजपेयी हिंदू राष्ट्रवाद का नरम चेहरा थे जिनकी प्रमुख राजनीतिक विरोधी भी तारीफ करते थे।" 

'जब वाजपेयी ने मिनार-ए-शरीफ नहीं जाने की सलाह नकार दी'

How Pakistani media covered former prime minister of india Atal Bihari vajpayee demise news
द नेशन में प्रकाशित अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर - फोटो : The Nation
द नेशन

एक अन्य प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार द नेशन में प्रकाशित अटल जी की खबर का शीर्षक दिया, 'जब वाजपेयी ने मिनार-ए-शरीफ नहीं जाने की सलाह की नकार दी।' 

अखबार ने लिखा, "जबकि ज्यादातर भारतीय नेता पाकिस्तान का विरोध करते हैं और सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि वे इसे ध्वस्त कर देना चाहते हैं,  अटल बिहारी वाजपेयी वे थे जिन्होंने इस इस्लामी देश के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश की थी।" 



डेली टाइम्स

डेली टाइम्स ने लिखा, "तीन बार भारत के प्रधान मंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार को निधन हो गया, राजनीति के हर वर्ग ने श्रद्धांजलि अर्पित की, नरेंद्र मोदी ने सम्मानित राजनेता की "अपूरनीय क्षति" पर शोक जताया।

अखबार ने लिखा, "पूर्व पत्रकार और कवि से राजनेता बने वाजपेयी संसद में मौजूद कुछ विपक्षी सांसदों में से एक थे जब भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू पद पर आसीन थे।" 

खबर में आगे लिखा गया, "उनका पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर 1990 के दशक में ऊंचाई पर पहुंच गया, जब उन्होंने अपनी उत्कृष्ट भाषण कला से देश भर में अपनी रैलियों में हजारों लोगों को आकर्षित किया।" 
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