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कैसे चुना जाता है पाकिस्तान में राष्ट्रपति?

Tue, 30 Jul 2013 07:11 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Tue, 30 Jul 2013 07:11 PM IST
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how does president elected in pakistan?

पाकिस्तान के नेता मंगलवार को नए राष्ट्रपति का चुनाव कर रहे हैं। नए राष्ट्रपति पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के आसिफ अली ज़रदारी की जगह लेंगे।

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चुनाव प्रचार के लिए अधिक समय न देने का आरोप लगाते हुए पीपीपी ने राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार किया है। इसलिए अब मुक़ाबला नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-एन) और इमरान ख़ान की पार्टी तहरीके इंसाफ के बीच ही रह गया है।
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पीएमएल (एन) ने ममनून हुसैन और तहरीके इंसाफ ने वजीहुद्दीन अहमद को उम्मीदवार बनाया है।

देश में 1973 में लागू संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति के पास बहुत अधिक शक्तियाँ तो नहीं थीं लेकिन जनरल जिया उल हक़ और परवेज़ मुशर्रफ़ जैसे सैन्य शासकों ने नेताओं पर नियंत्रण के लिए संशोधन कर बहुत से अधिकार अपने पास रखे।
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इनमें प्रमुख हैं- सेना के प्रमुखों की नियुक्ति, नेशनल और प्रांतीय असेंबलियों को भंग करने और प्रधानमंत्री को हटाने का अधिकार। लेकिन निवर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अप्रैल 2010 में एक संविधान संशोधन के जरिए इन शक्तियों को छोड़ दिया था।

आइए जानते हैं कि कैसे होता है पाकिस्तानी राष्ट्रपति का चुनाव?

चुनाव में वोट कौन देता है?
राष्ट्रपति का चुनाव देश की चारों प्रांतीय असेंबलियों और संसद के दोनों सदनों के सदस्य मिलकर करते हैं।

पाकिस्तान का आम मतदाता राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सेदारी नहीं करता है। जनता संसद के निचले सदन और प्रांतीय असेंबलियों के सदस्यों का चुनाव करती है।

कितना महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
यह चुनाव अत्यधिक प्रतीकात्मक है। आसिफ अली ज़रदारी देश के पहले ऐसे चुने हुए राष्ट्रपति होंगे जो अपना कार्यकाल पूरा कर एक दूसरे चुने हुए राष्ट्रपति को सत्ता सौंपेंगे। पाकिस्तान के इतिहास में यह एक मील का पत्थर होगा। इसके पहले के राष्ट्रपतियों को सेना ने बलपूर्वक पद छोड़ने के लिए मजबूर किया है।

राष्ट्रपति के पास कितनी शक्तियाँ होती हैं?
निर्वतमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी 2008 में राष्ट्रपति बने थे। उस समय उन्हें जो शक्तियां मिली थीं, उनमें शामिल था सैन्य प्रमुखों की नियुक्ति का अधिकार, नेशनल और प्रांतीय असेंबलियों को भंग करने और प्रधानमंत्री को हटाने का अधिकार। ये सारे अधिकार 1973 के संविधान में राष्ट्रपति के पास नहीं थे। लेकिन नेताओं पर नियंत्रण रखने के लिए जनरल ज़िया उल हक़ और परवेज़ मुशर्रफ़ जैसे सैन्य शासकों ने इन्हें लागू किया।

आसिफ़ अली ज़रदारी ने अप्रैल 2010 में एक संविधान संशोधन के ज़रिए ये शक्तियां छोड़ दीं।

कैसे चुना जाता है राष्ट्रपति?
संसद के सदस्य एक वोट देते हैं। जबकी प्रांतीय असेंबलियों के सदस्यों के मत की गणना एक जटिल प्रक्रिया के ज़रिए की जाती है।

सभी चारों प्रांतीय असेंबलियों को उनके आकार और जनसंख्या को दरकिनार कर एकसमान वोट दिए गए हैं।

देश की सबसे छोटी असेंबली बलूचिस्तान के सभी 65 सदस्यों के पास एक-एक वोट देने का अधिकार है। वहीं सबसे अधिक सदस्यों वाली पंजाब असेंबली के सदस्य के वोट को एक वोट का छठवाँ हिस्सा गिना जाता है।

चुनाव की निगरानी कौन करेगा?
इस्लामाबाद स्थित संसद भवन और प्रांतीय राजधानियों में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की निगरानी में मतदान होगा।

पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने अदालतों से चुनाव की निगरानी के लिए कहा है।

इस चुनाव का प्रभाव क्या होगा?
राष्ट्रपति के पास शक्तियाँ कम हैं। इसलिए इससे पाकिस्तान की राजनीति में बदलाव आने की संभावना कम है।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शक्तियों को प्रभावित करने की क्षमता इस तथ्य से कम हो जाती है कि दोनों ही पदों पर एक ही पार्टी के नेताओं का कब्जा होगा।

उम्मीदवारों का संक्षिप्त परिचय
ममनून हुसैन: राष्ट्रपति चुनाव में पीएमएल (एन) के उम्मीदवार ममनून हुसैन सिंध प्रांत के गवर्नर रह चुके हैं। संसद के दोनों सदनों और प्रांतीय असेंबलियों में पीएमएल (एन) के सदस्यों की संख्या को देखते हुए उनका राष्ट्रपति चुना जाना तय माना जा रहा है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के विदेशी मामलों व राष्ट्रीय सुरक्षा पर सलाहकार सरताज़ अज़ीज़ को दरकिनार कर हुसैन को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाने ने पीएमएल (एन) और पाकिस्तान के राजनीतिक हलके में कई लोगों को आश्चर्य में डाल दिया।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। जून 1999 में भी पीएमएल (एन) की सरकार के आख़िरी दिनों में भी उन्हें इसी तरह सिंध प्रांत का गवर्नर बनाया गया था। गवर्नर बनने से पहले वह कराची चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रमुख थे।


कई लोगों का मानना है कि कराची के इस व्यापारी की पीएमएल (एन) के प्रति वफ़ादारी के इनाम के रूप में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया है।

कराची के इंस्टीट्यूट ऑफ़ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से स्नातक ममनून हुसैन का जन्म 1940 में अविभाजित भारत के आगरा में हुआ था। बँटवारे के समय उनका परिवार पाकिस्तान चला गया। उन्होंने 1970 में पीएमएल (एन) की सदस्यता ली।

वजीहुद्दीन अहमद: तहरीके इंसाफ के उम्मीदवार वजीहुद्दीन अहमद भी कराची से ही है। अहमद पेशे से वकील हैं। वे 2007 में आल पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (एपीडीएम) के समर्थन से परवेज मुशर्रफ के ख़िलाफ़ राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुके हैं।

उस समय कई न्यायाधीशों, वकीलों और राजनेताओं ने जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ अभियान चलाया था।

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