फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   diary of malala

'मैं शटल कॉक नहीं पहनूंगी'

Sun, 31 Mar 2013 04:48 PM IST
Updated Sun, 31 Mar 2013 04:48 PM IST
विज्ञापन
diary of malala
शनिवार, 24 जनवरी: ऑनर बोर्ड पर शायद इस साल किसी का नाम न लिखा जाए
विज्ञापन


हमारी वार्षिक परीक्षा छुट्टियां ख़त्म होने के बाद होगी, लेकिन यह तभी होंगे जब तालिबान लड़कियों को स्कूल जाने की इजाज़त दें। तैयारी करने के लिए हमें कुछ चैप्टर बताए गए हैं, मगर मेरा दिल पढ़ने को नहीं कर रहा है।

कल से फ़ौज ने भी मिंगोरा में शैक्षणिक संस्थानों की हिफ़ाज़त के लिए कमान संभाल ली है। जब दर्जनों स्कूल तबाह हो गए और सैकड़ों बंद हुए तो अब जाकर फ़ौज को हिफ़ाज़त का ख़्याल आया। अगर वह सही ऑपरेशन करते तो यह नौबत पेश ही न आती।
विज्ञापन


मुस्लिम ख़ान ने कहा है कि वह उन तालीमी इदारों पर हमला करेंगे जिनमें फ़ौजी होंगे। अब तो स्कूल में फ़ौजियों को देख कर हमारा ख़ौफ़ और भी बढ़ जाएगा।

सोमवार, 26 जनवरी, 2009: हेलिकॉप्टर का खौ़फ़ ओर टॉफ़ियों की बारिश

आज सुबह सवेरे तोप के गोलों की आवाज़ें सुन कर नींद से जाग उठी। बहुत ज़्यादा गोला बारी हुई है। पहले हम हेलिकॉप्टरों के शोर से डरते थे और अब तोप के गोलों से।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुझे याद है कि जब ऑपरेशन शुरू हुआ था, उस वक़्त जब पहली मर्तबा हेलिकॉप्टर हमारे घरों के ऊपर से गुज़रे थे तो हम ख़ौफ़ के मारे छिप गए थे। मेरे मुहल्ले के सभी बच्चों की यही हालत थी।

मां-बाप के आंसू

एक दिन हेलिकॉप्टरों से टॉफ़ियां फेंकी गई और फिर ये सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। अब मेरे भाई और मुहल्ले के दूसरे बच्चे जैसे ही हेलिकॉप्टर की आवाज़ सुनते हैं तो बाहर निकल कर टॉफ़ियों के फेंके जाने का इंतज़ार करते हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होता।

थोड़ी देर पहले अब्बू ने ख़ुखब़री सुनाई कि वह हमें कल इस्लामाबाद लेकर जा रहे हैं। हम सब बहन भाई बहुत ख़ुश हैं।

बुधवार, 28 जनवरी, 2009:
मैंने अम्मी और अब्बू की आंखों में आंसू देखे

अब्बू ने अपना वायदा पूरा किया और हम कल ही इस्लामाबाद आ गए। रास्ते में बहुत डर लग रहा था क्योंकि मैंने सुना था कि तालिबान रास्ते में तलाशी लेते हैं। लेकिन अच्छा हुआ कि हमारे साथ ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय फ़ौज ने हमारी तलाशी ली।

जब स्वात का इला़क़ा ख़त्म हो गया तो हमारा ख़ौफ़ ख़त्म हो गया। हम इस्लामाबाद में अब्बू के एक दोस्त के साथ ठहरे हुए हैं।

मैं पहली बार इस्लामबाद आई हूं, यह एक ख़ूबसूरत शहर है, यहां बड़े-बड़े बंगले और सा़फ़ सुथरे सड़कें हैं लेकिन इसमें वह नेचुरल ब्यूटी नहीं जो मेरे स्वात में है।

अब्बू हमें लोक विरसा लेकर गए। यहां मेरी जानकारी में बहुत इज़ा़फ़ा हुआ। स्वात में भी इसी क़िस्म का म्यूज़ियम है लेकिन मालूम नहीं कि वह सुरक्षित रह भी सकेगा या नहीं?

शटल कॉक नहीं पहनूंगी

लोक विरसा से निकलकर अब्बू ने एक बूढ़े शख़्स से हमारे लिए पॉपकॉर्न ख़रीदा। इस शख़्स ने जब पश्तो में बात की तो अब्बू ने उनसे पूछा कि क्या आप इस्लामाबाद के रहने वाले हैं तो उस बूढ़े ने जवाब दिया कि आपको क्या लगता है कि इस्लामाबाद पश्तूनों का हो सकता है?

इस शख़्स ने बताया कि वो मुहमंद एजेंसी का रहने वाला है जहां पर फ़ौजी ऑपरेशन शुरू हो गया है। उसने कहा, "मैं घर-बार छोड़ आकर यहां आया हूँ।" मैंने देखा उसकी बात सुनकर मेरे अब्बू और अम्मी की आंखों में आंसू आ गए थे।

गुरुवार, 13 जनवरी 2009: मैंने 'शटल कॉक' पहनने से इनकार कर दिया

स्वात की जंग से हमने सिर्फ़ इतना फ़ायदा उठाया कि अब्बू ने ज़िंदगी में पहली मर्तबा हम सब घर वालों को मिंगोरा से निकाल कर अलग-अलग शहरों में ख़ूब घुमाया फिराया।

हम कल इस्लामाबाद से पेशावर आ गए। वहां पर हमने अपने एक रिश्तेदार के घर में चाय पी और इसके बाद हमारा इरादा बन्नू जाने का था।

मेरा छोटा भाई जिसकी उम्र पांच साल है हमारे रिश्तेदार के घर के आंगन में खेल रहा था। अब्बू ने जब उसे देख कर पूछा क्या कर रहे हो बच्चे, तो उसने कहा 'मिट्टी से बाबा क़ब्र बना रहा हूँ'।

बाद में हम एक वैगन में बैठ कर बन्नू के लिए रवाना हो गए। वैगन पुरानी थी और ड्राइवर भी रास्ते में हॉर्न बहुत बजा रहा था। एक बार जब ख़राब सड़क की वजह से वैगन एक खड्डे में गिर गई तो उस वक़्त अचानक हॉर्न भी बज गया तो मेरा एक दूसरा भाई जो दस साल का है, अचानक नींद से जाग गया।

वह बहुत डरा हुआ था, जागते ही अम्मी से पूछने लगा, 'अबई (अम्मी) क्या कोई धमाका हो गया है'।

रात को हम बन्नू पहुंच गए जहां पर मेरे अब्बू के दोस्त पहले से ही हमारा इंतज़ार कर रहे थे। मेरे अब्बू के दोस्त भी पश्तून है मगर इनके घरवालों की ज़बान हमें पूरी तरह समझ नहीं आ रही है।

हम बाज़ार गए, फिर पार्क। यहां पर औरतें जब बाहर निकलती हैं तो उन्हें टोपी वाला बुर्क़ा, जिसे यहां (शटल कॉक) लाज़मी पहनना होगा। मेरी अम्मी ने तो पहन लिया मगर मैंने इनकार कर दिया क्योंकि मैं इसमें चल नहीं सकती हूं।

स्वात के मु़क़ाबले में यहां अमन ज़्यादा है। हमारे मेज़बानों ने बताया कि यहां भी तालिबान हैं मगर जंगें इतनी नहीं होतीं जितनी स्वात में होती हैं।

उन्होंने कहा कि तालिबान ने यहां भी लड़कियों के स्कूलों को बंद करने की धमकी दी थी मगर फिर भी स्कूल बंद नहीं हुए।

मलाला कहती हैं कि स्कूलों के बंद होने के बाद घर पर वो बहुत बोर हो गईं।

शनिवार, एक फ़रवरी, 2009: स्वात के सैकड़ों लोगों के ख़ून का हिसाब कौन लेगा?

बन्नू से पेशावर आते हुए रास्ते में मुझे स्वात से अपनी एक सहेली का फ़ोन आया। वह बहुत डरी हुई थी, मुझ से कहने लगी, हालात बहुत ख़राब हैं तुम स्वात मत आना। उसने बताया कि फ़ौजी कार्रवाई तीव्र हो गई है और मोर्टार के गोलों से सिर्फ़ आज ही सैंतीस लोग मारे गए हैं।

शाम को हम पेशावर पहुंचे और बहुत थके हुए थे। मैंने एक न्यूज़ चैनल लगाया तो वहां भी स्वात की बात हो रही थी। उसमें लोगों को पैदल जाते हुए दिखाया जा रहा था, मगर उनके हाथ ख़ाली थे।
अब स्कूल नहीं खुलेंगे

मैंने सोचा कि एक वह वक़्त था जब बाहर से लोग तफ़रीह के लिए स्वात आया करते थे और आज स्वात के लोग अपने इला़क़े को छोड़ कर जा रहे हैं।

मैंने दूसरा चैनल लगाया जिस पर एक महिला कह रही थी कि 'हम शहीद बेनज़ीर भुट्टो के ख़ून का हिसाब लेंगे'। मैंने पास बैठे अब्बू से पूछा कि सैकड़ों स्वातियों के ख़ून का हिसाब कौन लेगा?

सोमवार, तीन फ़रवरी, 2009: स्कूल नहीं खुले, मैं बहुत ख़फ़ा हूं

आज हमारे स्कूल खुलने का दिन था। सुबह उठते ही स्कूल बंद होने का ख़्याल आया तो ख़फ़ा हो गई। इससे पहले जब भी स्कूल तय तारीख़ पर न खुलता तो हम ख़ुश हो जाया करते थे। इस दफ़ा ऐसा नहीं है क्योंकि मुझे डर है कि कहीं हमारा स्कूल तालिबान के हुक्म पर हमेशा के लिए बंद न हो जाए।


अब्बू ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों ने लड़कियों की तालीम पर पाबंदी के ख़िलाफ़ लड़कों के स्कूलों को आठ फ़रवरी तक न खोलने का एलान भी किया है। अब्बू ने बताया कि लड़कों के प्राइवेट स्कूलों के दरवाज़ों पर ये नोटिस लगाया गया है कि स्कूल नौ फ़रवरी को खुल जाएंगे।

उन्होंने बताया कि लड़कियों के स्कूल पर ये नोटिस नहीं लगा है जिसका मतलब है कि हमारे स्कूल अब नहीं खुलेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed