मैं उस वक्त तेरह बरस की थी, बहुत रोई पर...
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संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में बाल विवाह अब भी आम बात है। पाकिस्तान में करीब 25 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र में हो जाती है।
रेशमा की मिसाल देखिए। अब 29 साल की हो चुकी रेशमा ने बीबीसी संवाददाता शुमैला जाफरी को बताया कि किन हालात में उन्हें अपने ही चचेरे भाई से निकाह करना पडा और वो भी मात्र 13 बरस की उम्र में।
रेशमा कहती हैं, "तब मैं पांचवीं कक्षा में पढती थी। मेरा स्कूल छुडवा दिया गया। मेरी मां ने मुझे बताया कि मेरी शादी होने जा रही है। मैं बहुत रोई, लेकिन किसी ने मेरी परवाह नहीं की।"
रेशमा कहती हैं, "मेरी मां ने कहा कि अगर मैं शादी नहीं करूंगी तो घर में मसले और बढ जाएंगे।" पाकिस्तान में जबरन शादी के अनगिनत मामलों में रेशमा एक उदाहरण है।
जोही गांव में यह प्रथा स्थानीय हिंदू और मुसलमानों में सदियों से चली आ रही है।
सिंध प्रांत में बाल विवाह को रोकने के लिए नया सख्त कानून बनाया है और इस अपराध को गैरजमानती बना दिया है, दोषी पर जुर्माना लगाने और कैद का प्रावधान किया गया है।
लेकिन नए कानून के तहत अभी तक एक भी व्यक्ति को सजा नहीं हुई है।
नए कानून का असर
मौलवी मोहम्मद अमीन का परिवार जोही का परिवार पिछली तीन पढियों से निकाह करवा रहा है। मोहम्मद अमीन कहते हैं कि नए कानून के बाद अब शादी के लिए नई प्रक्रिया अपनाई जाती है।
अमीन कहते हैं, "मैं अब दूल्हा-दुल्हन के पहचान पत्र दिखाने को कहता हूं। दोनों का 18 साल का होना जरूरी है।"
नुक्कड थिएटर सुजाक इलाके के गांवों में पिछले पाँच साल से बाल विवाह के प्रति लोगों को जागरूक करने की कोशिशों में लगा है।
थिएटर ग्रुप से जुडे मसूद भी मानते हैं कि अब माहौल कुछ बदला है। वे कहते हैं, "पहले हम जहां भी जाते थे, हमारा विरोध होता था। वे मानते थे कि ये तो उनके रीति-रिवाजों का हिस्सा है।"
लेकिन अब जब उन्हें बताया जाता है कि ऐसा करने पर उन्हें सजा हो सकती है, तो वह हमारा विरोध नहीं करते।