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मलाला को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अभियान
बीबीसी
Updated Fri, 09 Nov 2012 11:00 PM IST
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पाकिस्तान की मलाला युसुफजई को नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाए इसके लिए दुनिया भर के लोग एकजुट हो रहे हैं। दुनियाभर के तकरीबन 10 हजार लोगों ने इस ऑनलाइन अभियान में अपने दस्तखत किए हैं। यहां तक कि ब्रिटेन सरकार ने भी इस अभियान का समर्थन किया है। 15 वर्षीय मलाला पाकिस्तान में लड़कियों की पढ़ाई को लेकर अपने अभियान के कारण चर्चित रही हैं।
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मलाला यूसुफजई पर पाकिस्तान में जानलेवा हमला हुआ था, उन्हें सर में गोली मारी गई थी। लेकिन मलाला बच गईं और इस समय ब्रिटेन में उनका इलाज चल रहा है। मलाला के पिता का कहना है कि उनकी बेटी को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने के लिए दुनिया भर से मिल रहे समर्थन से मलाला काफी खुश है। ब्रिटेन के डॉक्टरों का कहना है कि मलाला की हालत में काफी सुधार है और उन्होंने प्रगति की नई मिसाल क़ायम की है।
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खास है मलाला
इस बीच शनिवार का दिन मलाला के नाम पर 'ग्लोबल डे ऑफ़ ऐक्शन' घोषित किया गया है। इसका मकसद तीन करोड़ 20 लाख वैसे बच्चों को स्कूल भेजना है जिन्होंने कभी स्कूल की शक्ल नहीं देखी।
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संयुक्त राष्ट्र के विशेष शिक्षा प्रतिनिधि गार्डन ब्राउन इस समय इस्लामाबाद में हैं। मलाला के नाम पर घोषित किए गए 'ख़ास दिन' से पहले पाकिस्तान पहुँचे गॉर्डन ब्राउन उन पाकिस्तान लड़कियों के मामले पर विचार-विमर्श कर रहे हैं, जो अभी तक स्कूल नहीं जा पाई हैं।
पाकिस्तान की स्वात घाटी में चरमपंथी संगठन तालिबान ने लड़कियों के स्कूल जाने पर रोक लगा दी थी और मलाला उनमें से एक है। जब ये रोक लगी थी, तब मलाला 11 साल की बच्ची थी लेकिन उसने पढ़ना लिखना जारी रखा था बेशक वो स्कूल नहीं जाती थी।
उसी वक्त मलाला ने बीबीसी की उर्दू सेवा के लिए भी ‘गुल मकई’ नाम से डायरी लिखनी शुरू की थी। इसमें उन्होंने लिखा कि किस तरह से तालिबान के प्रतिबंधों ने उनकी क्लास में पढ़ने वाली लड़कियों की जिंदगी पर असर डाला।