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मलाला के सिर से गोली निकाली, हालत स्थिर
बीबीसी हिन्दी
Updated Wed, 10 Oct 2012 12:25 PM IST
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लड़कियों की शिक्षा के लिए अभियान चलाने वाली मलाला युसुफ़ज़ई को उस समय गोली मार दी गई थी जब वो स्कूल से घर वापस लौट रही थी। मंगलवार को ये घटना स्वात घाटी के मुख्य शहर मिंगोरा में हुई। पाकिस्तान के तालिबान ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है।
पाकिस्तानी तालिबान के प्रवक्ता एहसानउल्लाह एहसान ने बीबीसी उर्दू को बताया कि मलाला पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वो तालिबान के खिलाफ थी, धर्म निरपेक्ष थी और उसे बख्शा नहीं जाएगा। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा है कि तालिबान के हमले में घायल इस लड़की को इलाज के लिए विदेश भेजा जाना चाहिए।
हमले की निंदा
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने कहा है कि इस हमले से इस्लामिक चरमपंथियों से लड़ने की पाकिस्तान की प्रतिबद्धता पर असर नहीं पड़ेगा। वहीं प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ ने कहा, "हमें उस मानसिकता से लड़ना होगा जो हमले के लिए ज़िम्मेदार है। हमें इसकी निंदा करनी होगी। मलाला मेरी बेटी की तरह है, वो आपकी भी बेटी है। अगर ऐसी ही मानसिकता रही तो किसकी बेटी सुरक्षित रहेगी।"
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मलाला पहली बार सुर्खियों में वर्ष 2009 में आईं जब 11 साल की उम्र में उन्होंने तालिबान के साए में ज़िंदगी के बारे में बीबीसी उर्दू के लिए डायरी लिखना शुरु किया। इसके लिए उन्हें वर्ष 2011 में बच्चों के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। पाकिस्तान की स्वात घाटी में लंबे समय तक तालिबान चरमपंथियों को दबदबा था लेकिन पिछले साल सेना ने तालिबान को वहां से निकाल फेंका।
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पाकिस्तानी तालिबान के प्रवक्ता एहसानउल्लाह एहसान ने बीबीसी उर्दू को बताया कि मलाला पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वो तालिबान के खिलाफ थी, धर्म निरपेक्ष थी और उसे बख्शा नहीं जाएगा। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा है कि तालिबान के हमले में घायल इस लड़की को इलाज के लिए विदेश भेजा जाना चाहिए।
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हमले की निंदा
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने कहा है कि इस हमले से इस्लामिक चरमपंथियों से लड़ने की पाकिस्तान की प्रतिबद्धता पर असर नहीं पड़ेगा। वहीं प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ ने कहा, "हमें उस मानसिकता से लड़ना होगा जो हमले के लिए ज़िम्मेदार है। हमें इसकी निंदा करनी होगी। मलाला मेरी बेटी की तरह है, वो आपकी भी बेटी है। अगर ऐसी ही मानसिकता रही तो किसकी बेटी सुरक्षित रहेगी।"
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मलाला पहली बार सुर्खियों में वर्ष 2009 में आईं जब 11 साल की उम्र में उन्होंने तालिबान के साए में ज़िंदगी के बारे में बीबीसी उर्दू के लिए डायरी लिखना शुरु किया। इसके लिए उन्हें वर्ष 2011 में बच्चों के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। पाकिस्तान की स्वात घाटी में लंबे समय तक तालिबान चरमपंथियों को दबदबा था लेकिन पिछले साल सेना ने तालिबान को वहां से निकाल फेंका।