पाकिस्तान को फिर लगा बड़ा झटका, एफएटीएफ ने 'ग्रे लिस्ट' में डाला नाम
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आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान पर शिकंजा कसने के लिए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। पाकिस्तान पर आरोप है कि वह आतंकवादियों की आर्थिक मदद को रोक पाने में असफल रहा है। इस बड़े झटके से अब पाकिस्तान को ये डर सता रहा है कि कहीं उसे ब्लैक लिस्ट में ना डाल दिया जाए।
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आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान पर शिकंजा कसने के लिए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। पाकिस्तान पर आरोप है कि वह आतंकवादियों की आर्थिक मदद को रोक पाने में असफल रहा है। इस बड़े झटके से अब पाकिस्तान को ये डर सता रहा है कि कहीं उसे ब्लैक लिस्ट में ना डाल दिया जाए।
अधिकारियों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए पाकिस्तान ने 15 महीनों के अंदर 26 सूत्रीय एक्शन प्लान भी तैयार किया था बावजूद इसके उसके खिलाफ ये कदम उठाया गया।
इस एक्शन प्लान में बताया गया है कि आतंकियों को दी जाने वाली आर्थिक मदद को किस प्रकार रोका जाएगा और इसके लिए कौन कौन से कदम उठाए जाएंगे। इसमें मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को दी जा रही आर्थिक मदद पर भी रोक की बात कही गई है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार यह फैसला एफएटीएफ की पैरिस में हुई बैठक में बुधवार रात किया गया। उस वक्त वहां पाकिस्तान के वित्त मंत्री शमशाद अख्तर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। बता दें एफएटीएफ एक अंतर्राज्यीय निकाय है जो धन शोधन तथा आतंकवादी वित्तीयन का सामना करने के लिए मानक निर्धरित करता है। इसकी स्थापना 1989 में हुई थी।
26 सूत्रीय एक्शन प्लान जमा करने के बाद आया फैसला
पाकिस्तान की 26 सूत्रीय एक्शन प्लान को एफएटीएफ ने मान लिया। पैरिस में हुई इस बैठक में अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखने का समर्थन किया। बताया जा रहा है कि इस बैठक में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा पाकिस्तान के खास सहयोगी चीन, तुर्की और सऊदी अरब भी मौजूद थे। इन सहयोगियों ने भी इस ग्रे लिस्ट के फैसले का पूर्ण समर्थन किया।
विदेशी ऑफिस के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को ग्रे सूची में बरकरार रखना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह एक राजनीतिक फैसला है और आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रदर्शन का इससे कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस लिस्ट में एक साल या उससे भी अधिक समय तक रह सकता है।