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मौत के 39 साल बाद जुल्फिकार अली भुट्टो को कोर्ट ने किया शहीद घोषित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 03 Apr 2018 06:48 PM IST
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की मौत के 39 साल बाद एक बड़ा फैसला आया है। सिंध हाईकोर्ट ने भुट्टो को शहीद का दर्जा देते हुए उनके नाम के आगे शहीद जोड़ा है। कोर्ट का कहना है कि भुट्टो तानाशाही शासन का शिकार हुए थे। भुट्टो पाकिस्तान के सबसे ताकतवर नेताओं में थे पर उन्हें फौज ने 1977 में गद्दी से उतार दिया था और दो साल बाद उन्हें फांसी दे दी गई थी। उन पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी के हत्या में शामिल होने होने का आरोप लगता रहा, जिससे वो हमेशा इनकार करते रहे।
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भुट्टो 1973 से 1977 तक प्रधानमंत्री रहे और इससे पहले अयूब खान के शासनकाल में विदेश मंत्री रहे थे। लेकिन अयूब खान से मतभेद होने के कारण उन्होंने अपनी नई पार्टी (पीपीपी) 1967 में बनाई। 1962 के भारत-चीन युद्ध, 65 और 71 के पाकिस्तान युद्ध, तीनों समय वो महत्वपूर्ण पदों पर आसीन थे।
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1965 के युद्ध के बाद उन्होंने ही पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम का ढांचा तैयार किया था। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर उन्हें 1979 में फांसी पर लटका दिया गया था जिसमें सैन्य शासक जिया उल हक का हाथ समझा जाता है।
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भुट्टो ने अपनी जिंदगी के ज्यादातर आखिरी साल रावलपिंडी जेल में गुजारे। उन्होंने यहीं से अपनी सजा के खिलाफ अपील भी की थी। ब्रिगेडियर लतीफ उन्हें आदर्श कैदी मानते थे। पूर्व पाकिस्तानी नेता बेनजीर भुट्टो इन्ही की बेटी थी जो आगे चलकर पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं। 2007 में रावलपिंडी में एक राजनीतिक रैली के बाद आत्मघाती बम और गोलीबारी से दोहरा आक्रमण कर, बेनजीर की भी हत्या कर दी गई थी।